ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बीते सोमवार को कहा कि, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूची तैयार करने के लिए वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3डी मैपिंग सहित विस्तृत व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने इस बयान में कहा कि, जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूची तैयार करने का कार्य 48 वर्षों के अंतराल के बाद 25 मार्च से शुरू होने वाला है।
पृथ्वीराज हरिचंदन का बड़ा बयान...
मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि, प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल मंदिर के आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की पारदर्शिता तथा उचित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कियागया है।ओडिशा के कानून मंत्री ने बताया कि, पहली बार, विशेषज्ञ सुनारों के साथ-साथ रत्नविज्ञानी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारी भी इस कार्य में शामिल होंगे।
वस्तुओं का कोई मूल्यांकन नहीं किया जाएगा
हालांकि, ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस दौरान स्पष्ट किया है कि, वस्तुओं का कोई मूल्यांकन नहीं किया जाएगा और यह प्रक्रिया केवल दस्तावेजीकरण तथा सत्यापन तक ही सीमित रहेगी। ओडिशा में 12वीं शताब्दी के मंदिर में होने वाली इस प्रक्रिया की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद, उन्होंने कहा कि, यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत चर्चा की गई कि रत्न भंडार की यह प्रक्रिया व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए।
दैनिक अनुष्ठानों में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि, इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर के दैनिक अनुष्ठानों में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और अधिकारियों को श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।