गर्मी के मौसम में अचानक होने वाली ओलावृष्टि लोगों को हैरान कर देती है। कई बार छोटे दानों जैसे दिखने वाले ओले कुछ ही मिनटों में बड़े बर्फीले गोले का रूप ले लेते हैं। लेकिन आखिर ये ओले बनते कैसे हैं और क्या जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा कारण बन रहा है?
बादलों के भीतर शुरू होती है ओलों की कहानी
विशेषज्ञों के मुताबिक, ओलों का निर्माण क्यूम्यूलोनिम्बस यानी विशाल गर्जन वाले बादलों के भीतर होता है। इन बादलों में मौजूद पानी की बूंदें तेज ठंडी हवाओं के कारण ऊपर की ओर पहुंचती हैं, जहां तापमान बेहद कम होता है। यहां पहुंचकर बूंदें जमने लगती हैं और छोटे-छोटे बर्फीले कणों का रूप ले लेती हैं।
कैसे बनते हैं गोलाकार बर्फीले गोले?
जब ये जमे हुए कण बादलों के भीतर ऊपर-नीचे घूमते रहते हैं, तो उनके ऊपर पानी की नई परतें जमती जाती हैं। हर बार जमने के साथ उनका आकार बढ़ता है और धीरे-धीरे वे गोलाकार ओलों में बदल जाते हैं। जब उनका वजन इतना बढ़ जाता है कि हवा उन्हें संभाल नहीं पाती, तब वे जमीन पर गिरने लगते हैं।
क्या जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही ओलावृष्टि?
मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण वातावरण में नमी और तापमान में असामान्य बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इससे तेज तूफानी बादल ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं, जो ओलावृष्टि जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि हर ओलावृष्टि के पीछे सिर्फ क्लाइमेट चेंज जिम्मेदार नहीं होता, लेकिन बदलता मौसम इसके पैटर्न को जरूर प्रभावित कर रहा है।
किसानों और आम लोगों पर असर
ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है। फसलों को भारी नुकसान होने के साथ-साथ तेज ओले वाहनों, घरों और बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अचानक बदलते मौसम के कारण अब ऐसी घटनाएं कई इलाकों में पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं।