नई दिल्ली: एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र और राज्य सरकारों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत माना जाता है, तो फिर सभी धर्मों के त्योहारों, जुलूसों और सार्वजनिक आयोजनों पर भी समान नियम लागू होने चाहिए।
'अनुच्छेद 25 सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है'
'ईद मिलाप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार देता है। ऐसे में केवल नमाज को निशाना बनाना उचित नहीं है।
'नमाज पर आपत्ति, बाकी आयोजनों पर चुप्पी क्यों?'
ओवैसी ने कहा कि जब मुस्लिम समुदाय सड़क पर नमाज पढ़ता है तो उस पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन दूसरे धर्मों के जुलूस, शोभायात्राएं और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिलती। उन्होंने इसे "डबल स्टैंडर्ड" करार देते हुए कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
मांस की दुकानों और शराब पर भी उठाया सवाल
ओवैसी ने कहा कि यदि कुछ धार्मिक अवसरों पर मांस की दुकानों को बंद कराने की मांग की जाती है, तो रमजान के पूरे महीने शराब की दुकानों को भी बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि आखिर अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए जाते हैं।
'मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा'
एआईएमआईएम प्रमुख ने आरोप लगाया कि अजान और नमाज जैसे मुद्दों को जानबूझकर मुस्लिम त्योहारों के समय उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को दूसरे दर्जे का नागरिक समझना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
यूपी और बंगाल के फैसलों पर भी टिप्पणी
ओवैसी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब Yogi Adityanath ने हाल ही में कहा था कि नमाज निर्धारित व्यवस्था के तहत पढ़ी जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कई शिफ्ट में भी आयोजित की जा सकती है। वहीं Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाले विपक्ष ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई और इसे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया।
सड़कों पर नमाज को लेकर क्या बोले ओवैसी?
ओवैसी ने कहा कि सड़क पर नमाज रोजाना नहीं पढ़ी जाती, बल्कि केवल शुक्रवार या ईद जैसे विशेष अवसरों पर होती है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग सभी धर्मों के त्योहार और जुलूस सार्वजनिक सड़कों पर निकलते हैं, इसलिए केवल एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।