भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस में मंथन का दौर तेज हो गया है। पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के इस बार राज्यसभा की दौड़ से खुद को अलग रखने की खबरों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। ऐसे में अब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।
दिल्ली में हुआ लंबा मंथन
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान और मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, विधायकों की संख्या और संभावित चुनौतियों पर विचार किया गया। इसके बाद कमलनाथ के नाम पर सहमति बनने की खबरें सामने आई हैं।
कमलनाथ के नाम पर नहीं दिखा विरोध
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ के नाम को लेकर किसी बड़े नेता ने आपत्ति नहीं जताई है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि उनके नाम पर सहमति बनने से पार्टी के भीतर किसी प्रकार की अंतर्कलह की संभावना कम होगी। साथ ही राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग या अन्य राजनीतिक जोखिमों को भी सीमित किया जा सकेगा।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है। दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद पार्टी की संख्या 64 रह गई है। वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय की रोक और बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल प्रकरण के चलते कांग्रेस के प्रभावी वोटों की संख्या करीब 62 मानी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या तो है, लेकिन किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक अस्थिरता पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यही वजह है कि पार्टी ऐसा उम्मीदवार चाहती है जिस पर सभी वर्गों और नेताओं की सहमति हो।
कमलनाथ के पक्ष में कई समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कमलनाथ के पक्ष में कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। इनमें उनका लंबा राजनीतिक अनुभव, संगठन में स्वीकार्यता और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रमुख हैं। कमलनाथ केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय पदाधिकारी भी रह चुके हैं और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर भी कार्य कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें राज्यसभा में भेजकर संसद में एक अनुभवी चेहरा बनाए रखना चाहती है।
बीजेपी की रणनीति पर भी नजर
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस संभावना को भी ध्यान में रखकर चल रही है कि यदि बीजेपी तीसरी सीट पर भी आक्रामक रणनीति अपनाती है तो ऐसा उम्मीदवार होना चाहिए जो पार्टी के विधायकों को एकजुट रख सके। कमलनाथ को इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।
अन्य नाम भी चर्चा में
हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में जब तक पार्टी हाईकमान अंतिम फैसला नहीं लेता, तब तक दिग्विजय सिंह, Meenakshi Natarajan, अरुण यादव और जीतू पटवारी समेत अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में बने रहेंगे।
बीजेपी ने साधा निशाना
वहीं बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पहले दिग्विजय सिंह को राज्यसभा की दौड़ से बाहर किया गया और अब कमलनाथ को राज्यसभा भेजकर प्रदेश की राजनीति से दूर करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया है।
हाईकमान के फैसले का इंतजार
फिलहाल कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। हालांकि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के भीतर बन रही सहमति को देखते हुए कमलनाथ की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।