नई दिल्ली। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और सरकार इसे अत्यंत गंभीरता से ले रही है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
एनटीए की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने National Testing Agency की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि जब तक परीक्षा संचालन में व्यक्तिगत स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी गड़बड़ियां दोहराई जाती रहेंगी।
जस्टिस P. S. Narasimha और जस्टिस Alok Aradhe की पीठ ने कहा कि केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी की क्या भूमिका है और किसी त्रुटि की स्थिति में कौन जवाबदेह होगा।
छात्रों के भविष्य को लेकर अदालत की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद केवल प्रशासनिक मुद्दे नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करके इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता उनकी उम्मीदों पर गहरा प्रभाव डालती है।
अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
एनटीए की कार्यशैली को बताया 'एड-हॉक'
पीठ ने एनटीए की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की महत्वपूर्ण परीक्षाओं का संचालन अस्थायी या "एड-हॉक" तरीके से नहीं किया जा सकता। परीक्षा संस्थाओं को मजबूत प्रशासनिक ढांचे, स्पष्ट जिम्मेदारियों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के साथ काम करना चाहिए।
यूपीएससी मॉडल अपनाने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने Union Public Service Commission का उदाहरण देते हुए कहा कि एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि यूपीएससी वर्षों से बड़ी और संवेदनशील परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और अपेक्षाकृत विवाद-मुक्त व्यवस्था बनाए रखने में सफल रहा है।
केंद्र सरकार से मांगा विस्तृत हलफनामा
कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय को निर्देश दिया कि एनटीए की संगठनात्मक क्षमता, संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद की सुनवाई करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों और परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा बना रहे।
जुलाई में होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत हलफनामे और परीक्षा सुधारों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। मामले पर देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।