मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने छात्रों के हित में बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब 9वीं और 10वीं कक्षा में बेसिक गणित विषय से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी भी 11वीं कक्षा में गणित विषय चुन सकेंगे। मंडल ने इस संबंध में नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था को इसी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया है। इस फैसले से हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने वाली है, जो अब तक पुराने नियमों के कारण गणित विषय लेने से वंचित रह जाते थे।
पहले क्या था नियम?
अब तक केवल वही छात्र-छात्राएं 11वीं कक्षा में गणित विषय लेकर आगे पढ़ाई कर सकते थे, जिन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में स्टैंडर्ड गणित विषय लिया होता था। बेसिक गणित से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को गणित विषय चुनने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में कई छात्रों को अपनी रुचि के बावजूद विज्ञान या मैथ्स स्ट्रीम छोड़नी पड़ती थी।
दो साल पहले शुरू हुआ था बेसिक और स्टैंडर्ड गणित का विकल्प
स्कूल शिक्षा विभाग ने दो वर्ष पहले 9वीं कक्षा से बेसिक और स्टैंडर्ड गणित का विकल्प शुरू किया था। हालांकि दोनों वर्गों के लिए पाठ्यपुस्तक एक ही रखी गई थी, लेकिन परीक्षा के प्रश्नपत्र अलग-अलग होते थे। स्टैंडर्ड गणित का पेपर अपेक्षाकृत कठिन माना जाता था, जबकि बेसिक गणित आसान स्तर का होता था।
विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा फायदा
माशिमं के इस फैसले के बाद अब विद्यार्थी अपनी रुचि और भविष्य की योजना के अनुसार 11वीं में गणित विषय चुन सकेंगे। इससे उन छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा जिन्होंने 9वीं और 10वीं में कठिनाई के कारण बेसिक गणित लिया था, लेकिन बाद में उनकी रुचि गणित और विज्ञान विषयों में बढ़ गई। स्कूल प्राचार्यों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और उन्हें करियर चुनने में ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। पहले कई छात्र केवल पुराने नियमों के कारण विज्ञान संकाय में प्रवेश नहीं ले पाते थे।
स्टैंडर्ड गणित लेने वाले छात्रों की संख्या थी कम
प्राचार्यों के अनुसार, स्कूलों में बेसिक गणित चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक रहती थी, जबकि स्टैंडर्ड गणित लेने वाले छात्र कम होते थे। कई छात्र बाद में विज्ञान संकाय लेना चाहते थे, लेकिन नियमों के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाता था। इसी समस्या को देखते हुए मंडल ने नियमों में बदलाव किया है।
माशिमं सचिव ने क्या कहा?
माशिमं के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य ने कहा कि अब बेसिक और स्टैंडर्ड गणित की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार 11वीं में गणित विषय चुन सकेंगे। यह फैसला विद्यार्थियों के करियर विकल्पों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
छात्रों और अभिभावकों में खुशी
मंडल के इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को भविष्य में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य विज्ञान आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का बेहतर मौका मिलेगा।