नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। इस दौरे की घोषणा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर की। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड आगमन दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर होगा और इससे रणनीतिक, आर्थिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच अप्रैल 2026 में ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ था। ऐसे में माना जा रहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा।
क्रिस्टोफर लक्सम बोले- भारत हमारी आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि भारतीय प्रधानमंत्री अगले सप्ताह न्यूजीलैंड पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और न्यूजीलैंड के आर्थिक भविष्य में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। लक्सम ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, कृषि, नवाचार, तकनीक और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा दोनों देशों की दीर्घकालिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा।
FTA के बाद रिश्तों को मिलेगी नई गति, व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष फोकस
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जमीन पर तेजी से लागू करना माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह समझौता अप्रैल 2026 में हुआ था, जिसके बाद व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। न्यूजीलैंड सरकार का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और उद्योगों को नए बाजार उपलब्ध होंगे। भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक न्यूजीलैंड की कंपनियों की पहुंच आसान होगी, जबकि भारतीय उत्पादों और सेवाओं को भी न्यूजीलैंड में बेहतर अवसर मिलेंगे।
15 वर्षों में 20 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य, भारत में बनेगा 'न्यूजीलैंड सिंगल डेस्क'
इस दौरे के दौरान निवेश को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने बताया था कि उनकी सरकार अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना पर काम कर रही है। निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भारत सरकार 'न्यूजीलैंड सिंगल डेस्क' व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमत हुई है। इस प्रणाली के जरिए न्यूजीलैंड के निवेशकों को भारत में परियोजनाओं की मंजूरी, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सरकारी अनुमतियों में तेजी मिलेगी। इससे निवेश का माहौल और अधिक अनुकूल बनने की उम्मीद है।
किसानों, छात्रों, उद्योगों और पेशेवरों को होगा सीधा लाभ
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके तहत कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, पर्यटन, खेल, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस समझौते का लाभ दोनों देशों के किसानों, छोटे और मध्यम उद्योगों, महिला उद्यमियों, छात्रों और कुशल पेशेवरों को मिलेगा। इसके अलावा टैलेंट मोबिलिटी के जरिए दोनों देशों के युवाओं और पेशेवरों के लिए रोजगार एवं शिक्षा के नए अवसर भी खुलेंगे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी भी होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और न्यूजीलैंड रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपने सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। इस यात्रा के दौरान कई अहम समझौतों और संयुक्त घोषणाओं की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे दोनों देशों के संबंध एक नए स्तर पर पहुंच सकते हैं।