नई दिल्ली. भारतीय डाक विभाग ने वर्ष 2026 से बचत योजनाओं और निवेश प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नए वित्तीय नियम लागू कर दिए हैं। आयकर नियमों और पोस्ट ऑफिस एसबी आदेश संख्या 02/2026 के तहत अब डाकघरों में होने वाले बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य टैक्स अनुपालन को मजबूत करना और संदिग्ध लेन-देन पर प्रभावी निगरानी रखना है। इससे लाखों खाताधारकों और निवेशकों की प्रक्रियाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
बिना पैन के नहीं खुलेंगे नए खाते
नए नियमों के बाद अब डाकघर में नया खाता खुलवाने, बड़ी नकद राशि जमा करने, पैसे निकालने और टाइम डिपॉजिट जैसी निवेश योजनाओं में पैन नंबर देना जरूरी होगा। जिन लोगों के पास पैन कार्ड उपलब्ध नहीं है, उन्हें अब ‘फॉर्म 97’ भरना पड़ेगा। इस फॉर्म में खाताधारक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, लेन-देन का पूरा विवरण और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना इस प्रक्रिया के कोई भी आवेदन आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
टीडीएस बचाने वालों के लिए आया नया फॉर्म
ब्याज आय पर टीडीएस से राहत पाने वाले ग्राहकों के लिए भी नियम बदल गए हैं। अब पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह नया ‘फॉर्म 121’ लागू किया गया है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए जरूरी होगा जिनकी वार्षिक आय कर दायरे से बाहर है और जो ब्याज पर टैक्स कटौती से छूट चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यह फॉर्म जमा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा ब्याज पर टीडीएस कट सकता है। विभाग का डिजिटल सिस्टम पूरी तरह अपडेट होने तक पुरानी प्रक्रिया सीमित रूप में जारी रह सकती है।
डाकघरों की जिम्मेदारी भी हुई दोगुनी
नए नियम लागू होने के बाद डाकघरों की जवाबदेही भी बढ़ा दी गई है। विभाग को ग्राहकों द्वारा जमा किए गए फॉर्म 121 और अन्य दस्तावेजों का रिकॉर्ड कम से कम सात वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी दस्तावेजों का सत्यापन सावधानीपूर्वक करें और डेटा सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करें। माना जा रहा है कि इससे वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
खाताधारकों को समय रहते करना होगा अपडेट
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि आम लोगों को जल्द से जल्द अपने डाकघर खातों को पैन कार्ड से लिंक करा लेना चाहिए। इसके साथ ही जिन लोगों की आय टैक्स दायरे से बाहर है, उन्हें समय पर फॉर्म 121 जमा कर देना चाहिए ताकि अनावश्यक टैक्स कटौती से बचा जा सके। विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि सभी केवाईसी दस्तावेज अद्यतन रखें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की देरी या परेशानी का सामना न करना पड़े।