भारतीय रेलवे ने फर्जी टिकटों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के टिकट की असलियत मौके पर ही जांची जा सकेगी। इसके लिए “7-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम” लागू किया जा रहा है।
अहमदाबाद की घटना के बाद फैसला
21 मार्च 2026 को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान एक ही सीरियल नंबर वाले दो टिकट मिलने से मामला सामने आया। जांच में पता चला कि प्रयागराज जंक्शन पर कुछ कर्मचारी असली टिकट की फोटोकॉपी बनाकर बेच रहे थे। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच अभी जारी है।
क्या है 7-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम
नई प्रणाली के तहत टिकट की जांच सात स्तरों पर की जाएगी, जिसमें यूनिक ट्रांजेक्शन नंबर, सुरक्षा पेपर, गुप्त कोड, प्रिंटिंग स्टाइल, स्याही, अक्षरों की बनावट और टिकट जारी होने का समय व स्थान शामिल हैं।
TTE ऐप से होगी रियल-टाइम जांच
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र द्वारा विकसित “TTE ऐप” को अब अनिवार्य कर दिया गया है। यह ऐप मोबाइल और हैंडहेल्ड डिवाइस पर टिकट को स्कैन कर तुरंत उसकी सत्यता बता देगा।
फर्जी मिलने पर तुरंत कार्रवाई
अगर कोई टिकट जांच में फर्जी पाया जाता है, तो ऐप के जरिए तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना भेजी जाएगी। साथ ही जिन कर्मचारियों के जरिए बार-बार फर्जी टिकट सामने आएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
100% टिकट कलेक्शन का लक्ष्य
रेलवे ने टिकट कलेक्शन रजिस्टर भी शुरू किया है, जिसके तहत स्टेशनों और ट्रेनों में 100% टिकट जांच और रिकॉर्डिंग सुनिश्चित की जाएगी।
क्या बोले अधिकारी
उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार सिंह के अनुसार, इस नई व्यवस्था के लिए टीटीई और स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।