मुम्बई. भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की वित्तीय सुरक्षा को लेकर एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक अब विदेशों में सुरक्षित रखा गया स्वर्ण भंडार तेजी से भारत वापस ला रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक संकटों ने दुनिया के कई देशों को अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क कर दिया है। भारत का यह कदम भी उसी बदलती वैश्विक सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
देश के भीतर बढ़ाई जा रही स्वर्ण सुरक्षा
आरबीआई के हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत के पास कुल 880.52 टन स्वर्ण भंडार मौजूद है। इसमें से लगभग 680 टन सोना अब देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का करीब 77 प्रतिशत हिस्सा है। कुछ वर्षों पहले तक स्थिति इससे बिल्कुल अलग थी। मार्च 2023 तक भारत का केवल 37 प्रतिशत सोना ही देश में रखा गया था। बीते छह महीनों में ही 104 टन से अधिक सोना विदेशों से वापस भारत लाया गया है।
विदेशों में रखी संपत्तियों को लेकर बढ़ी चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध और कई देशों पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। रूस और अफगानिस्तान जैसी घटनाओं ने यह दिखाया कि विदेशों में रखी गई संपत्तियां संकट के समय राजनीतिक दबाव का शिकार हो सकती हैं। इसी वजह से अब कई देश अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों को अपने नियंत्रण में रखने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की वास्तविक आर्थिक सुरक्षा तभी मजबूत होती है जब उसका स्वर्ण भंडार उसकी अपनी सीमा के भीतर मौजूद हो।
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ा सोने का महत्व
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी बढ़ाई है। पहले जहां कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 13.9 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि भारत अब केवल विदेशी मुद्रा पर निर्भर रहने के बजाय स्वर्ण आधारित वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में यह रणनीति भारत को भविष्य के संकटों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।
दुनिया के कई देश अपना रहे यही रास्ता
भारत के अलावा कई बड़े देश भी अपने स्वर्ण भंडार को वापस मंगाने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। फ्रांस ने न्यूयॉर्क से अपना बड़ा स्वर्ण भंडार पेरिस स्थानांतरित किया है, जबकि जर्मनी पहले ही सैकड़ों टन सोना वापस ला चुका है। पोलैंड भी इसे अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता का हिस्सा मानकर आगे बढ़ रहा है। इन कदमों से साफ है कि दुनिया अब आर्थिक सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो चुकी है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल सोने की भौतिक वापसी नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा संकेत है। भविष्य में यदि वैश्विक वित्तीय संकट या राजनीतिक तनाव और गहराता है, तो अपने संसाधनों पर सीधा नियंत्रण किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित होगा। भारतीय रिजर्व बैंक का यह कदम इसी दीर्घकालिक सोच और आर्थिक मजबूती की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।