नई दिल्ली: क्या भारत में अब प्लास्टिक के नोट चलेंगे? RBI कर रहा बड़ा मंथन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक आधारित बैंकनोट्स शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो नोटबंदी के बाद भारतीय मुद्रा व्यवस्था में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा सकता है। बढ़ती नकदी की मांग, नोट छापने की बढ़ती लागत और कागजी नोटों के जल्दी खराब होने जैसी चुनौतियों के बीच RBI इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
RBI बोर्ड बैठकों में हुई चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलिमर बैंकनोट्स को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि केंद्रीय बैंक की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस विषय पर मंथन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर बैंकनोट्स एक खास तरह के सिंथेटिक प्लास्टिक द्विअक्षीय उन्मुख पॉलीप्रोपाइलीन से बनाए जाते हैं। ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं। इनके जल्दी फटने या खराब होने की संभावना कम होती है, जिससे इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
सुरक्षा फीचर्स होंगे और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़ना आसान होता है। इससे नकली नोटों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, नोटों की गुणवत्ता लंबे समय तक बरकरार रहने से बार-बार छपाई की जरूरत भी कम हो सकती है।
नोट छापने का खर्च बढ़ा
RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकनोट छापने पर 6,372 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। खासकर 100 और 500 रुपये के नोट बड़ी संख्या में खराब होने के कारण चलन से बाहर करने पड़े हैं।
दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल
पॉलिमर नोट कोई नया प्रयोग नहीं है। दुनिया के 60 से अधिक देशों में इनका उपयोग किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में इसकी शुरुआत की थी, जबकि कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और रोमानिया जैसे देश भी इसे अपना चुके हैं।
अभी नहीं हुई आधिकारिक घोषणा
फिलहाल RBI ने पॉलिमर नोटों को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है। लेकिन अगर यह योजना लागू होती है, तो भारतीय करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और लोगों के हाथों में जल्द ही प्लास्टिक आधारित नोट नजर आ सकते हैं।