मुंबई में आयोजित '100 वर्ष की संघ यात्रा - नए क्षितिज' व्याख्यान माला के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि, संघ किसी सत्ता या शक्ति का भूखा नहीं है, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास और चरित्र निर्माण के लिए समर्पित है।
संघ किसी सत्ता या शक्ति का भूखा नहीं है
मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि, संघ किसी सत्ता या शक्ति का भूखा नहीं है, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास और चरित्र निर्माण के लिए समर्पित है। इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा कि, संघ की तुलना दुनिया के किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती।
संघ को दूर से नहीं समझा जा सकता
RSS प्रमुख ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, जैसे आकाश की तुलना केवल आकाश से और समुद्र की समुद्र से की जा सकती है, वैसे ही संघ भी अपनी तरह का अनूठा संगठन है। मोहन यादव ने जोर दिया कि संघ को दूर से या सतही रूप में नहीं समझा जा सकता, इसे जानने के लिए इसका हिस्सा बनना और इसका अनुभव लेना आवश्यक है।
भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है
हिंदू की परिभाषा को समझाते हुए उन्होंने कहा कि 'हिंदू' शब्द को किसी संकीर्ण दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक सभ्यतागत पहचान है और इस देश में रहने वाले सभी लोग इसी व्यापक सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। आगे अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि, भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारी माता है और इसका विकास युवाओं की देशभक्ति पर टिका है।शताब्दी वर्ष के संकल्पों को दोहराते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने 'पंच परिवर्तन' पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हर हिंदू परिवार को अपने जीवन में पांच महत्वपूर्ण बदलाव अपनाने चाहिए।
1. विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना।
2. दूसरा है परिवारों में भारतीय संस्कारों और संवाद को बढ़ावा देकर कुंटुंब प्रबोधन करना।
3. तीसरा, जातिगत भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर समाज को एकजुट करना।
4. चौथा, प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीना
5. पांचवां नागरिक अनुशासन, अर्थात देश के कानूनों और नागरिक कर्तव्यों का पालन करना।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबका है
अपने भाषण के अंत में RSS प्रमुख डॉ. भागवत ने आह्वान किया कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हमें अपने आचरण और चरित्र से उदाहरण पेश करना होगा, ना कि केवल भाषणों से। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य सबके लिए है, क्योंकि संघ सबका है।
आपको बता दें कि, इस दो दिवसीय कार्यक्रम में उद्योग, कला, साहित्य और खेल जगत की 1200 से अधिक हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान, गीतकार प्रसून जोशी और फिल्म निर्माता सुभाष घई ने भी शिरकत की। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के प्रभावशाली वर्गों को संघ की विचारधारा और पिछले 100 वर्षों के कार्यों से अवगत कराना था।
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