तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति की नींव को हिला दिया है। अभिनेता जोसेफ विजय चंद्रशेखर की नवगठित पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ ने अपने पहले ही चुनाव में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके 107 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 11 सीट पीछे रह गई, लेकिन इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि तमिलनाडु की जनता अब बदलाव चाहती है।
डीएमके और एनडीए दोनों को लगा बड़ा झटका
इस चुनाव में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम गठबंधन 74 सीटों तक सिमट गया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन 53 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि राज्य में किसी अन्य छोटे दल या निर्दलीय उम्मीदवार का प्रभाव नहीं दिखा। यही वजह है कि अब सरकार गठन के लिए जोड़-तोड़ और रणनीतिक बातचीत का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु अब पूरी तरह त्रिशंकु राजनीति के दौर में प्रवेश कर चुका है।
सरकार बनाने के लिए विजय के सामने सबसे बड़ा गणित
टीवीके को सरकार बनाने के लिए 11 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। चूंकि विधानसभा में अन्य दलों की मौजूदगी बेहद सीमित है, इसलिए विजय के सामने विकल्प भी सीमित दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ी संभावना डीएमके गठबंधन के छोटे सहयोगियों को अपने पक्ष में लाने की मानी जा रही है। कांग्रेस, वामपंथी दल और विदुथलाई चिरुथिगल काची जैसे सहयोगियों के कुछ विधायक अगर समर्थन देते हैं तो विजय आसानी से बहुमत हासिल कर सकते हैं।
क्या डीएमके दे सकती है बाहर से समर्थन?
राजनीतिक गलियारों में एक और संभावना पर चर्चा तेज है कि डीएमके खुद टीवीके को बाहर से समर्थन दे सकती है। ऐसा होने पर राज्य में स्थिर सरकार बन सकती है और दल-बदल या टूट-फूट की स्थिति भी टल जाएगी। हालांकि डीएमके नेतृत्व अभी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने केवल इतना कहा है कि उनकी पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान करेगी। वहीं पार्टी सांसद कनिमोझी ने चुनावी नतीजों पर गंभीर आत्ममंथन की जरूरत बताई है।
एनडीए और एआईएडीएमके से दूरी का संदेश
टीवीके नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी और एआईएडीएमके के साथ जाने के पक्ष में नहीं है। पार्टी रणनीतिकारों ने भाजपा को वैचारिक विरोधी बताते हुए किसी भी संभावित गठबंधन की अटकलों को खारिज किया है। दूसरी ओर एआईएडीएमके नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से टीवीके के साथ किसी समझौते से इनकार किया है। इसके बावजूद तमिलनाडु की राजनीति में पर्दे के पीछे बातचीत की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा रहा।
राजभवन पर टिकी अब सबकी नजर
अब तमिलनाडु की राजनीति का अगला बड़ा अध्याय राजभवन में लिखा जाएगा। सबसे बड़े दल के रूप में टीवीके सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। यदि विजय आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहते हैं, तो वह 1967 के बाद तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ दलों के लंबे वर्चस्व को तोड़ते हुए एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत कर सकते हैं। आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।