उत्तराखंड: जौनसार-बावर में बच्चों के नाम महीनों और दिनों के आधार पर रखने की अनोखी परंपरा
उत्तराखंड के जौनसार-बावर में बच्चों के नाम हिंदू महीनों और सप्ताह के दिनों के आधार पर रखने की सदियों पुरानी अनोखी परंपरा आज भी जीवित है।
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Durgesh Vishwakarma
Created AT: 27 अगस्त 2025
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उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर की परंपराएं, रीति-रिवाज और संस्कृति हमेशा से ही अनूठी रही हैं। यहां बच्चों के नाम हिंदू कैलेंडर के महीनों और सप्ताह के दिनों के आधार पर रखने की परंपरा रही है। हालांकि आधुनिक समय में इस परंपरा में बदलाव देखा जा रहा है और अब लोग जन्म कुंडली व पंडित की सलाह से आधुनिक नामों को प्राथमिकता देने लगे हैं।


महीनों के आधार पर नामकरण


जौनसार-बावर में पहले समय में बच्चे का नाम उस महीने के अनुसार रखा जाता था, जिसमें उसका जन्म हुआ हो।


उदाहरण के लिए:


  1. चैत्र माह में जन्मे लड़के का नाम चैतू और लड़की का चैती
  2. वैशाख में वैशाखू,
  3. जेठ में जेठू,
  4. आषाढ़ में आषाढ़ू या आषाढ़ी,
  5. सावन में श्रावनू,
  6. भादो में भादू,
  7. असोज में अशोजीया,
  8. कार्तिक में कातकु,
  9. मार्गशीर्ष में मगशीरु,
  10. पौष में पुशू,
  11. माघ में मागु,
  12. फाल्गुन में फगुनिया नाम दिया जाता था।



चकराता तहसील के मंगरोली निवासी चेतू वर्मा और कोल्हा निवासी चैती देवी बताते हैं कि उनका नाम उनके जन्म माह के अनुसार ही रखा गया था। दिनों के आधार पर नामकरण सिर्फ महीनों ही नहीं, सप्ताह के दिनों के आधार पर भी नाम रखने की परंपरा थी।


  1. सोमवार को जन्मे बच्चे का नाम स्वारू,
  2. रविवार को ईतारु,
  3. मंगलवार को मंगलू,
  4. बुधवार को बुधराम,
  5. वीरवार को बीपारू,
  6. शुक्रवार को शुक्ररु,
  7. शनिवार को शशिया रखा जाता था।


बच्चों की संख्या के आधार पर भी नाम इसके अलावा परिवार में जन्मे बच्चे की संख्या के आधार पर भी नाम रखने का चलन था।


जैसे:

  1. 11वें बच्चे का नाम ग्यारु,
  2. 12वें का बारु रखा जाता था।


आठवें बच्चे को माना जाता है विशेष



जौनसार-बावर में आज भी यह मान्यता है कि अगर किसी परिवार में आठवां बच्चा जन्म लेता है, तो उसे आठुवा पुरुष कहा जाता है। इसे कष्टदायक माना जाता है और इस स्थिति में विशेष पूजा अनिवार्य मानी जाती है। परंपराएं बदल रही हैं समय के साथ इन परंपराओं में बदलाव आया है। अब अधिकतर लोग अपने बच्चों के नाम पंडित से कुंडली बनवाकर और आधुनिक सोच के अनुसार रखते हैं। इसके बावजूद जौनसार-बावर क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे नामों से जाने जाते हैं, जो उनके जन्म के महीने या दिन के आधार पर रखे गए थे।

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