


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को किसी भी प्रकार के दबाव में आकर व्यापार नहीं करना चाहिए। भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को बढ़ावा देने की पुरज़ोर वकालत की।
राष्ट्रीय कार्यक्रम में दिया बयान
मोहन भागवत 100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज नामक तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में बोल रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, भारतीय संस्कृति, और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।
दबाव में व्यापार नहीं किया जाता
भागवत ने कहा - जब स्वदेशी की बात करते हैं तो लगता है कि विदेशों से संबंध नहीं रहेंगे। ऐसा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार तो होगा, लेकिन उसमें दबाव नहीं, स्वेच्छा होनी चाहिए। किसी के उकसावे में नहीं आना है। दबाव में व्यापार नहीं किया जाता।
यह टिप्पणी अमेरिका की उस नीति के संदर्भ में आई जिसमें ट्रंप प्रशासन ने भारत पर टैरिफ का दबाव बनाया था। भागवत ने सरकार को परोक्ष रूप से सुझाव दिया कि वह किसी भी वैश्विक शक्ति के दबाव में न आए और स्वदेशी नीतियों को प्राथमिकता दे।
स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल
RSS प्रमुख ने लोगों से अपील की कि वे घर में बने पेय और खाद्य पदार्थों का अधिकाधिक उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए। भाषा, भूषा, भजन, भोजन — अपने घर के अंदर अपनी परंपरा का पालन हो। जहां आवश्यक हो, वहां अपनी भाषा के शब्दों का प्रयोग करो।
संस्कृति और आत्मनिर्भरता का संगम
भागवत ने स्वदेशी को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए।