सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को नवग्रहों में सबसे शुभ ग्रहों में से एक माना गया है। गुरु ग्रह को ज्ञान, शिक्षा, धर्म, धन, संतान और सौभाग्य का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि गुरुवार के दिन विधि-विधान से बृहस्पति देव की पूजा और उनसे जुड़े उपाय करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
देवताओं के गुरु बनने के लिए की कठोर तपस्या
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति को देवताओं का गुरु और नवग्रहों में स्थान सहज रूप से नहीं मिला था। इसके लिए उन्होंने भगवान शिव की वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
स्कंद पुराण में मिलता है उल्लेख
स्कंद पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र महर्षि अंगिरा के पुत्र का नाम जीव था। जीव अत्यंत बुद्धिमान, शांत स्वभाव और वेद-शास्त्रों के प्रकांड विद्वान थे। ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे काशी पहुंचे, जहां उन्होंने एक शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शिव की कठोर तपस्या आरंभ की। कहा जाता है कि उनकी यह तपस्या कई वर्षों तक चली। अंततः उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा।
भगवान शिव ने दिया 'बृहस्पति' नाम
भगवान शिव ने जीव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे संसार में 'बृहस्पति' के नाम से प्रसिद्ध होंगे। साथ ही उन्होंने उन्हें देवताओं का गुरु नियुक्त किया और धर्म, नीति तथा ज्ञान के मार्ग पर देवताओं का मार्गदर्शन करने का दायित्व सौंपा। इतना ही नहीं, भगवान शिव ने उन्हें नवग्रह मंडल में भी स्थान प्रदान किया, जिसके बाद बृहस्पति देव को देवगुरु और नवग्रहों में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ।
ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को शुभ फल देने वाला ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो तो उसे शिक्षा, धन, वैवाहिक सुख, संतान, सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। वहीं गुरु ग्रह कमजोर होने पर इन क्षेत्रों में बाधाएं आ सकती हैं।