समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण, महंगाई, राशन वितरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और संविधान समेत कई मुद्दों पर सरकार से सवाल किए। उनका सबसे ज्यादा जोर महिला आरक्षण कानून को लेकर रहा। अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण से संबंधित कानून पहले ही पारित हो चुका है, इसलिए इसे लागू करने में और इंतजार नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ही महिला आरक्षण लागू किया जाए।
लाल किले के भाषण को लेकर अखिलेश ने उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि लाल किले से देश को संबोधित करते समय तथ्यों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वहां ऐसी बात नहीं कही जानी चाहिए जिसके लिए कानून पहले से संसद से पारित हो चुका है। उन्होंने महिला आरक्षण कानून का हवाला देते हुए कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। इस कानून में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।
2027 के UP चुनाव में आरक्षण लागू करने की मांग
सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है तो कानून को जल्द अमल में लाया जाना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की मांग रखी। अखिलेश के अनुसार, इससे बड़ी संख्या में उन महिलाओं के लिए राजनीति में आने का रास्ता खुलेगा जो लंबे समय से चुनावी प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण लागू करने के लिए तैयार है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर BJP को घेरा
अखिलेश यादव ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन देश के विभाजन के इतिहास को जिस तरह प्रस्तुत करते हैं, उससे उनकी राजनीतिक सोच दिखाई देती है। सपा प्रमुख ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाजपा की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश का लोकतांत्रिक ढांचा संविधान पर आधारित है। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों और नागरिकों की जिम्मेदारी है कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया जाए।
‘तिरंगा यात्राओं’ पर भी साधा निशाना
भाजपा की ओर से आयोजित तिरंगा अभियानों को लेकर भी अखिलेश ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज जो लोग तिरंगा यात्राएं निकाल रहे हैं, उन्हें देशभक्ति को केवल किसी एक विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने अपनी पार्टी की विचारधारा को देश की विविधता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली सोच से जोड़ा। अखिलेश ने तंज करते हुए कहा कि ‘हर मन तिरंगा’ जैसे अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि देशभक्ति का संदेश सभी तक पहुंचे।
राशन और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने सरकार के आर्थिक विकास से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ने की बात कही जाती है, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में परिवार सरकारी राशन पर निर्भर हैं। अखिलेश ने उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर राशन वितरण का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि अगर आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है तो इतनी बड़ी आबादी को लगातार मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
महंगाई और पेट्रोल-डीजल के मुद्दे पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और विदेश नीति का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और इसका प्रभाव आम लोगों पर महंगाई के रूप में दिखाई देता है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी दवाओं को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी देश की प्रगति का मूल्यांकन सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं किया जा सकता।
स्कूल बंद होने के आंकड़ों का किया जिक्र
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव ने दावा किया कि राज्य में करीब 26 हजार स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने देशभर में लगभग एक लाख प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके मुताबिक, विकास का सही आकलन रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आम नागरिक के जीवन स्तर जैसे पैमानों पर भी किया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर कई मुद्दों पर सरकार को घेरा
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अखिलेश यादव का बयान कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने महिला आरक्षण को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से लागू करने की मांग के साथ-साथ संविधान, महंगाई, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उनके बयानों से यह संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी कर रही है।