नई दिल्ली। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पावन पर्व मनाया जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन को समर्पित यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन की हरियाली और भक्ति के माहौल के बीच महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए व्रत रखती हैं।
हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे हुई और इसका समापन 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे होगा। हरियाली तीज पर पूजा के लिए दो प्रमुख शुभ समय बताए गए हैं।
- प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 5:54 बजे से 9:07 बजे तक
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 6:38 बजे से रात 8:51 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ समयों में विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत
हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। इस दिन सोलह श्रृंगार का भी विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं हरे रंग की साड़ी, हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाकर माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने और पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
शिव-पार्वती की पूजा की विधि
हरियाली तीज पर सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल की सफाई की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनका विधिवत पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है। पूजन में भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल और जल अर्पित किया जाता है, जबकि माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती और हरियाली तीज की कथा का श्रवण किया जाता है।
108 वर्षों की तपस्या से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी मान्यता के कारण हरियाली तीज को शिव और शक्ति के पवित्र मिलन का पर्व माना जाता है।