उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नागपंचमी के अवसर पर 16 अगस्त रविवार रात 12 बजे खुलेंगे। पट खुलने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि जी महाराज पूजा-अर्चना करेंगे। पूजन के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हो जाएंगे, जो 17 अगस्त सोमवार रात 12 बजे तक लगातार 24 घंटे जारी रहेंगे।
नागपंचमी पर तीन बार होगी नागचंद्रेश्वर की पूजा
नागपंचमी के दिन भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा होगी। पहली पूजा मंदिर के पट खुलने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि जी महाराज करेंगे। इसके बाद 17 अगस्त दोपहर 12 बजे शासन की ओर से पूजा की जाएगी। शाम 7:30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुजारी-पुरोहित भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा करेंगे। रात 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े की पूजा के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
साल में सिर्फ एक बार होते हैं भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन
महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर की विशेष मान्यता है। यहां विराजित भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन श्रद्धालुओं को साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन होते हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान नागचंद्रेश्वर शिवलिंग रूप में विराजित हैं।
मंदिर के अग्रभाग में है दुर्लभ उमा-महेश्वर की प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर मंदिर के अग्रभाग में भगवान उमा-महेश्वर की प्राचीन और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, सिंधिया राजवंश इस प्रतिमा को नेपाल से उज्जैन लेकर आया था। करीब 350 वर्ष पहले मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान इस प्रतिमा को मंदिर के अग्रभाग में स्थापित किया गया था।
नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए अलग रहेगी व्यवस्था
मंदिर प्रशासन ने नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर और भगवान महाकाल के दर्शन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की हैं। सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को कर्कराज पार्किंग स्थित सामान्य दर्शन द्वार से प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश होते हुए प्रवेश द्वार क्रमांक-4 से मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। विश्रामधाम से होते हुए भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की निकासी चौबीस खंबा माता मंदिर रोड से कर्कराज पार्किंग की ओर होगी।
शीघ्र दर्शन के लिए गेट नंबर-5 से प्रवेश
भगवान नागचंद्रेश्वर के शीघ्र दर्शन के लिए श्रद्धालु हरसिद्धि चौराहा से बड़ा गणेश मंदिर के सामने होते हुए गेट नंबर-5 से विश्रामधाम पहुंचेंगे। दर्शन के बाद चौबीस खंबा माता मंदिर रोड से हरसिद्धि पाल की ओर जाने की व्यवस्था रहेगी।
महाकाल दर्शन के लिए भी अलग रूट तय
श्रावण मास के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के संयोग को देखते हुए भगवान महाकाल के दर्शन के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय स्थित त्रिवेणी प्रवेश द्वार से प्रवेश मिलेगा। इसके बाद नंदी द्वार, मानसरोवर फैसिलिटी, गणेश मंडप और कार्तिक मंडप होते हुए दर्शन मार्ग तक पहुंचाया जाएगा। दर्शन के बाद एम्बुलेंस गेट से निकासी और पिनाकी द्वार से बाहर जाने की व्यवस्था रहेगी। महाकाल के शीघ्र दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश नीलकंठ द्वार से निर्धारित किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए ये सुविधाएं रहेंगी उपलब्ध
मंदिर प्रशासन की ओर से सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूता स्टैंड, क्लॉक रूम, खोया-पाया केंद्र और शीघ्र दर्शन टिकट काउंटर की व्यवस्था रहेगी। नागपंचमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए दर्शन और निकासी के मार्ग अलग-अलग रखे गए हैं।