सुकमा: देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सुकमा के करीब 50 गांवों के लिए इस बार का 15 अगस्त एक अलग मायने रखता है। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे इन इलाकों में अब तिरंगा खुले तौर पर फहराया जा रहा है। ग्रामीणों के लिए यह केवल स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि बदले हुए माहौल और नई उम्मीद का प्रतीक बनकर सामने आया है। जहां कभी राष्ट्रीय पर्व के दौरान डर और बंद जैसी परिस्थितियां बनी रहती थीं, वहीं अब गांवों में बच्चे, बुजुर्ग और ग्रामीण तिरंगे के नीचे एक साथ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं।
नक्सल प्रभाव से बाहर आए इलाकों में दिखा बड़ा बदलाव
सुकमा के इन गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है। खास तौर पर 31 मार्च के बाद नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए इलाकों में सरकारी गतिविधियों और विकास कार्यों को गति मिलने की बात सामने आई है। अब जिन स्थानों पर राष्ट्रीय पर्व के आयोजन को लेकर चुनौतियां रहती थीं, वहां प्रशासन और ग्रामीण मिलकर स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित कर रहे हैं।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह
इन गांवों में इस बार तिरंगा फहराने को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों के लिए खुले माहौल में राष्ट्रध्वज को सलामी देना लंबे समय बाद सामान्य जिंदगी की ओर लौटने जैसा अनुभव है। खास तौर पर बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है। गांवों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के दौरान तिरंगा, राष्ट्रगान और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए जा रहे हैं।
काले झंडों की जगह अब दिख रहा तिरंगा
बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक राष्ट्रीय पर्वों पर अलग तरह का माहौल देखने को मिलता रहा। नक्सली बंद और विरोध के कारण कई इलाकों में स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों पर भी असर पड़ता था। अब तस्वीर बदल रही है। जहां कभी काले झंडों और बंद के साये की चर्चा होती थी, वहीं तिरंगे के साथ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दे रही है। प्रशासन इसे नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में बदलते माहौल और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ते कदम के तौर पर देख रहा है।
ग्रामीणों के लिए आजादी का मतलब हुआ और खास
ग्रामीणों का कहना है कि पहले स्वतंत्रता दिवस को लेकर मन में उत्साह तो रहता था, लेकिन खुले तौर पर आयोजन करना आसान नहीं था। इस बार गांव में तिरंगा फहराने और राष्ट्रीय पर्व मनाने की खुशी अलग है। ग्रामीणों के साथ बच्चों में भी कार्यक्रम को लेकर उत्साह है। उनके लिए यह पहली बार है जब वे अपने गांव में बिना किसी डर के स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बन रहे हैं।
विकास के साथ गांवों तक पहुंच रहा राष्ट्रीय पर्व
सुकमा के इन गांवों में बदलता माहौल सिर्फ स्वतंत्रता दिवस के आयोजन तक सीमित नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ प्रशासनिक गतिविधियों, सड़क और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। ऐसे में 50 गांवों में तिरंगे का लहराना स्थानीय लोगों के लिए बदलाव की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। 80वां स्वतंत्रता दिवस देश के लिए एक राष्ट्रीय उत्सव है, लेकिन इन गांवों के लिए यह सामान्य जीवन, सुरक्षा और नई उम्मीद के दौर की शुरुआत का प्रतीक बन गया है।