मंदसौर/उज्जैन, 15 अगस्त 2026 | देशभर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के दो प्रसिद्ध मंदिरों में आजादी का उत्सव चार दिन पहले ही आयोजित कर लिया गया। मंदसौर के भगवान पशुपतिनाथ मंदिर और उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 11 अगस्त को विशेष पूजा-अर्चना, तिरंगा यात्रा, महाआरती और ध्वजारोहण किया गया। इन मंदिरों में स्वतंत्रता दिवस की तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय हिंदू पंचांग की तिथि के आधार पर तय की जाती है। मंदिरों से जुड़े पुजारियों के अनुसार भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी और उस दिन पंचांग में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। वर्ष 2026 में यह तिथि 11 अगस्त को पड़ी, इसलिए मंदिरों में इसी दिन आजादी का उत्सव मनाया गया।
15 अगस्त 1947 से क्या है इस परंपरा का संबंध?
पंचांग रिकॉर्ड के अनुसार 15 अगस्त 1947 को अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। तिथि उस दिन शाम तक रही और उसके बाद अमावस्या शुरू हुई। मंदिरों की परंपरा में स्वतंत्रता दिवस को इसी चतुर्दशी तिथि से जोड़ा गया है।
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, इसलिए उसकी तिथियां ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीखों के मुकाबले हर वर्ष बदलती रहती हैं। इसी कारण इन मंदिरों में स्वतंत्रता दिवस हर साल 11 अगस्त को नहीं मनाया जाएगा। जिस दिन श्रावण कृष्ण चतुर्दशी पड़ेगी, उसी दिन स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार कार्यक्रम आयोजित होगा। यह मंदिरों की स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा है। देश का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया जाता है और इस राष्ट्रीय तारीख में कोई बदलाव नहीं होता।
पशुपतिनाथ मंदिर में हुआ अष्टमुखी शिवलिंग का विशेष अभिषेक
मंदसौर का प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर शिवना नदी के तट पर स्थित है और अपने अष्टमुखी शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। स्वतंत्रता दिवस के विशेष कार्यक्रम में भगवान पशुपतिनाथ का श्रृंगार कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई।
ज्योतिष एवं कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष उमेश जोशी के अनुसार शिवलिंग का दूर्वा मिले जल से विशेष अभिषेक किया गया। कार्यक्रम में करीब 250 श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और पूजा के बाद प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की प्रार्थना भी की। दूर्वा के जल से अभिषेक करने पर संकटों से मुक्ति मिलने की बात मंदिर से जुड़े पुरोहितों की धार्मिक मान्यता है। इसे प्रमाणित या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं, बल्कि पूजा परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए।
पशुपतिनाथ मंदिर में 1985 से जारी है परंपरा
मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा वर्ष 1985 से चली आ रही है। यानी करीब चार दशकों से यहां अंग्रेजी तारीख के बजाय पंचांग की तिथि पर आजादी का पर्व मनाया जाता है। इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ राष्ट्र के विकास, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में तिरंगा और देशभक्ति से जुड़े प्रतीक भी लगाए जाते हैं।
बड़े गणेश मंदिर में ढोल-नगाड़ों के साथ निकली तिरंगा यात्रा
उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में भी 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस मंदिर में भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा विराजित है। मंदिर से जुड़े पुजारियों के अनुसार यहां कई दशकों से राष्ट्रीय पर्व पंचांग की तिथियों के अनुसार मनाए जाते हैं।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ढोल-नगाड़ों और देशभक्ति के नारों के बीच तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद भगवान गणेश को राष्ट्रीय ध्वज अर्पित किया गया और विशेष महाआरती की गई। इसके बाद मंदिर के मुख्य शिखर पर तिरंगा फहराया गया। मंदिर प्रबंधन से जुड़े पुजारी अक्षत व्यास ने भगवान गणेश को “गणराज्य के देवता” के रूप में पूजे जाने की स्थानीय मान्यता का उल्लेख किया। यह मंदिर की परंपरा और पुजारी का धार्मिक दृष्टिकोण है।
दोनों मंदिरों में अलग-अलग तरीके से मना आजादी का पर्व
मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम मुख्य रूप से भगवान शिव के अभिषेक, वैदिक अनुष्ठान और राष्ट्र की उन्नति की प्रार्थना पर केंद्रित रहा।
उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में तिरंगा यात्रा, ध्वज अर्पण, महाआरती और मंदिर के शिखर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। दोनों जगह धार्मिक आस्था और राष्ट्रभक्ति को एक साथ जोड़कर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
क्या अगले साल भी चार दिन पहले मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस?
जरूरी नहीं। मंदिरों का आयोजन 11 अगस्त की तारीख से नहीं, बल्कि श्रावण कृष्ण चतुर्दशी की तिथि से जुड़ा है। चंद्र पंचांग की तिथियां हर वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर में आगे-पीछे होती हैं। इसलिए अगले वर्ष यह तिथि अगस्त की किसी दूसरी तारीख पर पड़ सकती है। इस वर्ष श्रावण कृष्ण चतुर्दशी 11 अगस्त को थी। इसी दिन सावन शिवरात्रि भी मनाई गई थी।
आस्था, इतिहास और राष्ट्रभक्ति का अनोखा संगम
मध्य प्रदेश के इन दोनों मंदिरों की परंपरा दर्शाती है कि किस तरह स्थानीय धार्मिक मान्यताएं राष्ट्रीय इतिहास की स्मृतियों के साथ जुड़ सकती हैं। यहां स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूजा, आरती, अभिषेक, तिरंगा यात्रा और राष्ट्र की प्रगति की कामना के रूप में मनाया जाता है। हालांकि इस परंपरा को देशभर में लागू नियम या स्वतंत्रता दिवस की अलग तारीख नहीं समझना चाहिए। यह मंदसौर और उज्जैन के इन मंदिरों में निभाई जाने वाली स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा है।
FAQ: मध्य प्रदेश के मंदिरों में चार दिन पहले स्वतंत्रता दिवस
1. मध्य प्रदेश के किन दो मंदिरों में 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया?
मंदसौर के भगवान पशुपतिनाथ मंदिर और उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 11 अगस्त 2026 को कार्यक्रम आयोजित हुआ।
2. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से पहले क्यों मनाया गया?
मंदिरों की परंपरा के अनुसार 15 अगस्त 1947 को हिंदू पंचांग में श्रावण कृष्ण चतुर्दशी थी। वर्ष 2026 में यही तिथि 11 अगस्त को पड़ी थी।
3. क्या इन मंदिरों में हर साल 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनता है?
नहीं। आयोजन श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को होता है। यह तिथि अंग्रेजी कैलेंडर में हर वर्ष बदल सकती है।
4. पशुपतिनाथ मंदिर में क्या कार्यक्रम हुआ?
अष्टमुखी शिवलिंग का विशेष श्रृंगार, दूर्वा मिले जल से अभिषेक, वैदिक पूजा और प्रसाद वितरण किया गया। करीब 250 श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
5. बड़े गणेश मंदिर में कैसे मनाया गया स्वतंत्रता दिवस?
ढोल-नगाड़ों के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई। भगवान गणेश को राष्ट्रीय ध्वज अर्पित करने के बाद महाआरती हुई और मंदिर के मुख्य शिखर पर तिरंगा फहराया गया।