हरिद्वार: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ में तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार और राजनीतिक माहौल को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए कहा कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर जताई नाराजगी
बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि कई जगह योग्य उम्मीदवारों के बजाय सिफारिश, रिश्वत या पहचान के आधार पर लोगों को फायदा पहुंचाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि योग्य युवाओं को उचित अवसर नहीं मिलता तो इससे युवाओं में निराशा पैदा होती है और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह अराजकता के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि व्यवस्था को सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आंदोलन जैसी स्थिति पैदा ही न हो।
भ्रष्टाचार को बताया गंभीर चुनौती
बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था में जहां भी भ्रष्टाचार है, उसे खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास होने चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार को देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के प्रति अन्याय बताते हुए व्यवस्था से जुड़े लोगों से ईमानदारी के साथ काम करने की अपील की।
शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
योग गुरु ने सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई जगह बच्चों को बिजली, पानी और किताबों जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। बाबा रामदेव के मुताबिक, देश के बच्चों और युवाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और सरकारों को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
Gen Z को लेकर भी दी नसीहत
बाबा रामदेव ने युवा पीढ़ी के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजादी का अर्थ मनमानी करना नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपनी स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारियों को समझने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने की अपील की।
राजनीतिक दलों से बोले- मतभेद रखें, नफरत नहीं
बाबा रामदेव ने देश के राजनीतिक माहौल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को लेकर कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से देशहित को प्राथमिकता देने और मिलकर काम करने की अपील की। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के लोगों के बीच नफरत बढ़ाना किसी के हित में नहीं है।
‘देश किसी एक व्यक्ति का नहीं’
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बाबा रामदेव ने देश के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत किसी एक व्यक्ति या सत्ता में बैठे कुछ लोगों का देश नहीं है, बल्कि हर भारतीय की इसमें बराबर भागीदारी है। उन्होंने लोगों से भ्रष्टाचार और नफरत के खिलाफ संकल्प लेने तथा देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की।