नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: टीवी देखने वाले दर्शकों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को 12 मिनट प्रति घंटे तक सीमित करने वाले करीब 20 साल पुराने नियम को हटाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि पिछले दो दशकों में टीवी प्रसारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है और अब दर्शकों के पास पहले की तुलना में कहीं ज्यादा चैनल और प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। इस फैसले के बाद टीवी चैनलों को विज्ञापन प्रसारित करने में पहले के मुकाबले ज्यादा स्वतंत्रता मिल सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था कब से लागू होगी, यह संबंधित संशोधन के राजपत्र में अधिसूचित होने के बाद स्पष्ट होगा।
20 साल पुरानी 12 मिनट की सीमा खत्म
वर्ष 2006 में केबल टेलीविजन नेटवर्क्स नियम, 1994 के तहत टीवी चैनलों के लिए विज्ञापनों की अवधि पर सीमा तय की गई थी। इसके तहत एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन की अनुमति थी। मंत्रालय के मुताबिक 2006 में भारत में करीब 62 टीवी चैनल थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 900 से अधिक हो चुकी है। इस दौरान केबल टीवी का डिजिटलीकरण भी पूरा हो गया है और DTH, केबल टीवी, HITS और IPTV जैसे माध्यमों ने दर्शकों के सामने कई विकल्प उपलब्ध करा दिए हैं।
चैनलों को क्यों मिली ज्यादा आजादी?
सरकार का तर्क है कि टीवी प्रसारण क्षेत्र में अब पर्याप्त प्रतिस्पर्धा है। दर्शकों के पास सैकड़ों चैनलों के विकल्प हैं और टीवी चैनलों की आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। मंत्रालय के अनुसार डिजिटल मीडिया पर विज्ञापनों की अवधि के लिए ऐसी समान सीमा नहीं है। ऐसे में पारंपरिक टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर अलग था। इसी को देखते हुए सरकार ने पुराने नियम को हटाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना और टीवी प्रसारण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाना बताया गया है।
क्या अब चैनल जितने चाहें उतने विज्ञापन दिखा सकेंगे?
12 मिनट की पुरानी सीमा हटने का मतलब यह है कि पहले जैसी निश्चित 12 मिनट प्रति घंटे की सीमा लागू नहीं रहेगी। हालांकि, इसका यह अर्थ जरूरी नहीं है कि टीवी चैनलों पर विज्ञापन को लेकर सभी प्रकार के नियम खत्म हो गए हैं। विज्ञापन की सामग्री, उपभोक्ता संरक्षण और अन्य लागू नियमों का पालन चैनलों को करना होगा। नई व्यवस्था के तहत विज्ञापन समय को लेकर वास्तविक स्थिति संशोधन के लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कब से लागू होगा नया नियम?
सरकार का फैसला उसी तारीख से प्रभावी होगा, जिस दिन Cable Television Networks Rules, 1994 में किए गए संशोधन को राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित किया जाएगा। यानी फिलहाल 12 मिनट की सीमा हटाने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इसकी व्यावहारिक प्रभावी तारीख राजपत्र अधिसूचना पर निर्भर करेगी।
विज्ञापन सीमा को लेकर पहले से चल रहा था कानूनी विवाद
टीवी विज्ञापन की 12 मिनट की सीमा को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद भी चल रहा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में ट्राई के सेवा गुणवत्ता संबंधी नियमों को बरकरार रखा था, जिनमें प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन की सीमा का प्रावधान था। इस व्यवस्था में 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के अपने प्रचार के लिए निर्धारित थे। इस मामले से जुड़ी याचिकाएं करीब 13 वर्षों से लंबित थीं। प्रसारकों की ओर से हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर भी विचार किया जा रहा था।
TRAI के नियमों पर क्या होगा असर?
सरकार के नए फैसले के बाद अब एक अहम सवाल यह है कि TRAI के संबंधित सेवा गुणवत्ता नियमों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पहलू को अलग से स्पष्ट किया जाना बाकी है। इसलिए दर्शकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 12 मिनट की पुरानी सीमा हटाने का फैसला सामने आ गया है, लेकिन नई विज्ञापन व्यवस्था पूरी तरह कब और किस रूप में लागू होगी, यह संबंधित अधिसूचना और नियमों से स्पष्ट होगा।
दर्शकों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद टीवी चैनलों को विज्ञापन स्लॉट के इस्तेमाल में अधिक लचीलापन मिल सकता है। वहीं दर्शकों के लिए इसका सीधा असर टीवी कार्यक्रमों के दौरान विज्ञापनों की मात्रा और ब्रेक की अवधि के रूप में देखने को मिल सकता है। यानी चैनलों के लिए यह फैसला कारोबार के लिहाज से राहत वाला हो सकता है, लेकिन दर्शकों के अनुभव पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रसारक अतिरिक्त विज्ञापन समय का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।