सनातन धर्म में साल भर 12 अमावस्या आती हैं, और हर अमावस्या को पावन माना जाता है। लेकिन माघ माह की अमावस्या को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और मौन व्रत रखते हैं।
माघ अमावस्या कब है?
पंचांग के अनुसार, माघ माह की अमावस्या 18 जनवरी 2026 को रात 12:03 बजे शुरू होकर 19 जनवरी 2026 की रात 1:21 बजे समाप्त होगी। इसलिए इस साल माघ अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी।
माघ अमावस्या पर क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले मौन रहकर स्नान करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- जरूरतमंदों को उड़द और चावल का दान दें।
- शाम को दक्षिण दिशा की ओर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और मुख्य द्वार पर भी दीपक रखें।
- पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।
- प्रयागराज और हरिद्वार में पवित्र स्नान करें।
- पितरों के तर्पण और पिंडदान अवश्य करें।
माघ अमावस्या पर क्या न करें?
- तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, लहसुन, प्याज का सेवन न करें।
- क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों से बचें।
- आसपास गंदगी न रहने दें।
- जानवरों को परेशान न करें, जैसे कुत्ता, गाय, कौवा आदि।
माघ अमावस्या पर किए गए दान, स्नान और तर्पण को अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। प्रयागराज का माघ मेला इस दिन विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां गंगा और संगम तट पर सबसे बड़ा पवित्र स्नान होता है।
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