New Delhi | आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी पूजन में फूलों का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को उनकी पसंद के फूल अर्पित करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त नौ दिनों तक अलग-अलग फूल अर्पित कर मां के नौ स्वरूपों का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
मां दुर्गा के नौ रूपों को कौन सा फूल चढ़ाएं?
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सफेद कनेर के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। सफेद फूलों से मां की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। इस दिन वट वृक्ष के फूल या गुड़हल अर्पित करने की मान्यता है। भक्त मां को फूल अर्पित कर संयम, तप और धैर्य की कामना करते हैं।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन कमल या पीले रंग के फूल अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता है कि इससे देवी की आराधना विशेष रूप से फलदायी होती है।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गुड़हल या चमेली के फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। इस दिन पीले रंग के फूल, जैसे गेंदे के फूल, अर्पित करना शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में रातरानी के फूलों का भी उल्लेख मिलता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। इस दिन गेंदे या अन्य पीले रंग के फूल अर्पित करने की धार्मिक परंपरा बताई जाती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार इस दिन नीले रंग के फूल, जैसे अपराजिता या कृष्णकमल, अर्पित किए जाते हैं।
आठवां दिन: मां महागौरी
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी के स्वरूप को श्वेत रंग से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन सफेद मोगरा या चमेली के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन चंपा या गुड़हल के फूल अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है।
नवरात्रि में फूल चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान
देवी पूजन में फूल अर्पित करते समय स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की धार्मिक परंपरा है। पूजा के लिए फूल चुनते समय इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:
- पूजा में ताजे और स्वच्छ फूलों का प्रयोग करें।
- सूखे, बासी या कीड़े लगे फूल अर्पित करने से बचें।
- जमीन पर गिरे हुए फूलों को पूजा में इस्तेमाल न करने की परंपरा है।
- फूलों को स्वच्छ जल से साफ करके ही देवी को अर्पित करें।
- लाल और पीले रंग के फूलों का देवी पूजन में विशेष महत्व माना जाता है।
- कनेर, चंपा, गुड़हल और चमेली जैसे फूलों का प्रयोग अलग-अलग पूजा परंपराओं में किया जाता है।
- सबसे महत्वपूर्ण है कि पूजा श्रद्धा और निष्ठा के साथ की जाए।
अलग-अलग परंपराओं में फूलों का विधान अलग हो सकता है
नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूपों को चढ़ाए जाने वाले फूलों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और पूजा पद्धतियों में भिन्न मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए किसी विशेष मंदिर, परिवार या संप्रदाय में प्रचलित पूजा-विधान का पालन करना उचित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में फूल अर्पित करना भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हुए भक्त सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।