जब एटीएम से पैसा निकालते समय बिजली चली जाती है या मशीन अचानक बंद हो जाती है, तो ट्रांजैक्शन अधूरा रह जाता है। इस स्थिति में मशीन कैश नहीं देती, लेकिन सर्वर पर ट्रांजैक्शन की एंट्री दर्ज हो सकती है। सिस्टम कुछ सेकंड के भीतर इस स्थिति का विश्लेषण करता है कि कैश वास्तव में ग्राहक को मिला या नहीं, और यदि कैश नहीं निकल पाया है तो इसे ‘फेल्ड ट्रांजैक्शन’ दर्ज किया जाता है।
क्या ऐसी स्थिति में अकाउंट से पैसे डेबिट हो जाते हैं?
कई बार तकनीकी गड़बड़ी के कारण ग्राहक के खाते से राशि डेबिट दिख जाती है, जबकि हाथ में कैश नहीं मिलता। यह स्थिति आमतौर पर ‘टेक्निकल एरर’ के तहत आती है, जो बिजली कटने, नेटवर्क फेल होने या मशीन जाम होने जैसे कारणों से होती है। ग्राहक के खाते में यह डेबिट अस्थायी होता है और बैंक की बैकएंड प्रक्रिया इसे स्वतः सुधार देती है।
क्या पैसा स्वतः वापस मिल जाता है?
आरबीआई के नियमों के अनुसार, यदि एटीएम ट्रांजैक्शन असफल हो जाता है लेकिन ग्राहक के खाते से पैसा डेबिट हो जाता है, तो बैंक को सात कार्यदिवसों के भीतर वह राशि ग्राहक के खाते में वापस करनी होती है। अधिकांश बैंक इस प्रक्रिया को 24 से 72 घंटे में पूरा कर देते हैं, क्योंकि मशीन और बैंक सर्वर में ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दिख जाता है कि कैश ग्राहक तक पहुँचा ही नहीं।
ग्राहक को क्या कदम उठाने चाहिए?
यदि पैसा सात कार्यदिवसों में वापस न आए, तो ग्राहक अपने बैंक की शाखा, कस्टमर केयर या मोबाइल बैंकिंग ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन की तारीख, समय और एटीएम लोकेशन की जानकारी देना जरूरी होता है। नियम के अनुसार, शिकायत के बाद भी बैंक समाधान में देरी करता है, तो बैंक को ग्राहक को प्रति दिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति भी देनी पड़ सकती है।
एटीएम सुरक्षा और तकनीकी अपग्रेड से मामलों में कमी
आजकल अधिकतर एटीएम UPS और बैकअप सिस्टम से लैस होते हैं, जिससे बिजली कटने जैसी समस्याएँ काफी कम हो गई हैं। मशीनें रियल-टाइम सर्वर कनेक्टिविटी और उन्नत तकनीक के माध्यम से ट्रांजैक्शन की स्थिति तुरंत अपडेट कर देती हैं, जिससे असफल ट्रांजैक्शन और गलत डेबिट के मामलों में लगातार कमी आई है।
ग्राहकों के लिए अंतिम सलाह
यदि एटीएम से कैश निकालते समय बिजली चली जाए, स्क्रीन बंद हो जाए या मशीन हैंग हो जाए, तो घबराएँ नहीं। ऐसे में कैश न निकलने पर भी डेबिट राशि वापस लौटने की पूरी गारंटी होती है। बैंकिंग नियम ग्राहक के हितों की रक्षा करते हैं और ऐसे मामलों में पैसा अपने आप वापस मिल जाता है।
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