भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सोमवार का दिन चुनौतीपूर्ण रहा, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पीएसएलवी-सी62 मिशन अपने अंतिम चरण में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। तीसरे चरण के अंत में आई तकनीकी खराबी के कारण रॉकेट निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया, जिसके चलते मिशन को असफल घोषित करना पड़ा। इसरो ने तत्काल तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य के अभियानों में ऐसी त्रुटियों से बचा जा सके।
असफलता के बीच सामने आया नया घटनाक्रम
मिशन की विफलता के बीच एक अहम और सकारात्मक घटनाक्रम सामने आया है। इस मिशन से जुड़ा स्पेन का सैटेलाइट किड री-एंट्री कैप्सूल सक्रिय बताया जा रहा है। रॉकेट से अलग होने के बाद कैप्सूल द्वारा अंतरिक्ष से सिग्नल और तकनीकी डाटा भेजे जाने का दावा किया गया है। इस खबर ने मिशन को लेकर निराशा के माहौल में एक नई उम्मीद पैदा कर दी है।
स्पेन की कंपनी का बड़ा दावा
स्पेन की कंपनी ऑर्बिटल प्रतिमान, जिसने ‘केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर’ यानी किड कैप्सूल विकसित किया है, ने कहा है कि रॉकेट में खराबी आने से पहले ही उनका कैप्सूल सफलतापूर्वक अलग हो चुका था। कंपनी के अनुसार, इसी वजह से कैप्सूल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसने अंतरिक्ष से डाटा ट्रांसमिट किया है। हालांकि इस दावे को लेकर इसरो की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
किड कैप्सूल का उद्देश्य और महत्व
किड कैप्सूल का मिशन तकनीकी दृष्टि से बेहद अहम था। इसे अंतरिक्ष में कुछ समय तक सक्रिय रहकर सिग्नल और तकनीकी डाटा भेजना था। इसके बाद कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करना था, जहां अत्यधिक तापमान और दबाव का सामना करना इसकी परीक्षा का मुख्य हिस्सा था। अंततः इसे समुद्र में गिरकर अपने प्रयोग को पूरा करना था, जिससे भविष्य की री-एंट्री तकनीकों को मजबूती मिल सके।
फिलहाल कैप्सूल की स्थिति
कंपनी के अनुसार, किड कैप्सूल इस समय अंतरिक्ष में सक्रिय बना हुआ है। यह पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं कि तकनीकी खराबी के बाद कैप्सूल किस कक्षा में और किस मार्ग से आगे बढ़ा। उसके पथ और डाटा से जुड़ी विस्तृत जानकारी आने वाले समय में सार्वजनिक की जाएगी। यदि कैप्सूल लंबे समय तक डाटा भेजने में सफल रहता है, तो इसे मिशन की आंशिक सफलता के रूप में देखा जा सकता है।
इसरो के लिए क्या मायने रखता है यह दावा
यदि स्पेन की कंपनी का दावा सही साबित होता है, तो यह पीएसएलवी-सी62 मिशन की साख को पूरी तरह नहीं सही तो आंशिक रूप से जरूर संभाल सकता है। यह दिखाएगा कि भले ही रॉकेट अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंचा, लेकिन उससे जुड़े कुछ तकनीकी प्रयोग सफल रहे। आने वाले दिनों में इसरो की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच रिपोर्ट से इस मिशन की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
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