‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार सोमवार, 2 मार्च को प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक आयोजित करने जा रही है। यह ऐतिहासिक बैठक में आयोजित होगी, जहां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पूरा मंत्रिमंडल उपस्थित रहेगा।सरकार का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना, कृषि आय बढ़ाना और योजनाओं को सीधे ज़मीन से जोड़ना है।
लोकदेवता भीलटदेव के आंगन से होगी कैबिनेट की शुरुआत
करीब ढाई हजार की आबादी वाले जनजातीय गांव नागलवाड़ी में यह कैबिनेट बैठक के आंगन से शुरू होगी। लगभग 800 वर्ष पुराने इस मंदिर का निमाड़–मालवा अंचल के जनजातीय समाज में गहरा सांस्कृतिक महत्व है।बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्रीगण मंदिर में दर्शन कर क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे।
पारंपरिक निमाड़ी लोकरंग में सजा कैबिनेट स्थल
कैबिनेट बैठक स्थल को पूरी तरह निमाड़ी लोकसंस्कृति के रंग में सजाया गया है। मंदिर शिखर के नीचे बने पार्क में तैयार डोम को निमाड़ के पारंपरिक घरों की शैली में डिजाइन किया गया है।सजावट, मुंडेर और प्रदर्शनी में स्थानीय खेती-किसानी के तौर-तरीके, ढोल-मांदल जैसे लोकवाद्य और जनजातीय जीवनशैली की झलक देखने को मिलेगी।
पांच डोम, बारह पैगोडा और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था
कार्यक्रम स्थल पर कुल पांच डोम बनाए गए हैं, जिनमें कृषि व जनजातीय विभाग की प्रदर्शनी, कैबिनेट बैठक कक्ष, ग्रीन रूम, भोजनशाला और मीडिया ब्रीफिंग की व्यवस्था है।इसके अलावा 12 से अधिक पैगोडा में रिसेप्शन, कंट्रोल रूम और प्रतीक्षा क्षेत्र बनाए गए हैं। सुरक्षा और यातायात को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
किसानों और प्रबुद्धजनों से सीधा संवाद
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री किसानों और प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद करेंगे। इस दौरान प्रदेश में संचालित योजनाओं की जानकारी साझा की जाएगी और क्षेत्रीय जरूरतों व अपेक्षाओं पर चर्चा होगी।इसके साथ ही मंत्री-मंडल जुलवानिया में आयोजित भगोरिया उत्सव में भी शामिल होगा, जिससे सरकार और जनजातीय समाज के बीच सीधा संवाद और मजबूत होगा।
निमाड़ी व्यंजनों से होगा अतिथियों का स्वागत
आगंतुकों के लिए विशेष रूप से निमाड़ी व्यंजन तैयार किए गए हैं। अमाड़ी की भाजी, मक्के की रोटी, दाल-पानिये, छाछ, कोदो पुलाव, निमाड़ी मिर्च भजिये और रागी की बालूशाही जैसे पारंपरिक स्वाद परोसे जाएंगे।
कृषि कैबिनेट में मछली पालन नीति पर भी बड़ा फैसला संभव
इस बैठक में राज्य सरकार की नई मत्स्य पालन नीति को मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके तहत मछली उत्पादन से जुड़े निवेश को 1600–1700 करोड़ रुपए तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।नई नीति में कोल्ड चेन, मार्केटिंग स्ट्रक्चर, रेफ्रिजरेटेड वैन और फीड प्लांट लगाने पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान होगा। केज कल्चर को बढ़ावा देने के लिए तालाबों और डैम में 10 साल की लीज पर जगह देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
खेत-खलिहानों से नीति निर्माण का संदेश
नागलवाड़ी में आयोजित यह कृषि कैबिनेट बैठक मोहन सरकार के उस विज़न को दर्शाती है, जिसमें मंत्रालय से निकलकर सरकार सीधे खेत-खलिहानों तक पहुंच रही है।यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि किसानों, जनजातीय समाज और सरकार के बीच भरोसे और भागीदारी की नई शुरुआत मानी जा रही है।
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