योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे सुधार का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अस्पतालों और भवनों का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज और जवाबदेही पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर की जाए। मरीजों को समय पर उपचार मिले और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि लोगों को प्रभावी और भरोसेमंद चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।
चिकित्सा शिक्षा में तेजी से बढ़ा विस्तार
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2016-17 की तुलना में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है। इसी अवधि में एमबीबीएस सीटें 5,390 से बढ़कर 12,800 और पीजी सीटें 1,344 से बढ़कर 5,067 तक पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मिल सकें।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा नेटवर्क
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान में 108 जिला अस्पताल, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3,757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी सेवाएं, 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं और 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें की गईं।
आयुष्मान योजना से लाखों मरीजों को राहत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि Ayushman Bharat योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। प्रदेश में अब तक 6,480 अस्पताल इस योजना से जुड़ चुके हैं और 96.75 लाख से अधिक मरीजों का निशुल्क इलाज किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयुष्मान योजना के क्लेम का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जाए।
डिजिटल हेल्थ मिशन को मिल रही गति
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रदेश में 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 15.14 करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। सरकार हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम को भी तेजी से विस्तार दे रही है, जिससे मरीजों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
मेडिकल रिसर्च और मेडटेक क्षेत्र में निवेश
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि ‘यूपी-आईएमआरएएस’ डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और क्लिनिकल ट्रायल यूनिट जैसी परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इस क्षेत्र में करीब 1,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं।
निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर, अयोध्या, सहारनपुर और कानपुर मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्हें तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाओं में देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
एम्बुलेंस नेटवर्क और आपात सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया अवधि में सुधार हुआ है। वर्तमान में 375 ALS एम्बुलेंस संचालित हैं और अब तक 9.38 लाख मरीजों को रेफर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रिस्पॉन्स टाइम और बेहतर करने के निर्देश दिए।
दवाओं की गुणवत्ता और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री योगी ने सख्त निर्देश दिए कि अस्पतालों में तीन महीने से कम एक्सपायरी वाली दवाएं न रखी जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 75 जिलों में डायलिसिस और 74 जिलों में सीटी स्कैन सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि 227 सीएचसी पर टेली-रेडियोलॉजी सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए संस्थागत प्रसव व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। साथ ही संचारी रोग नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाने और आशा वर्करों के भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।