हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने सिर्फ सिनेमा ही नहीं बल्कि इंडियन आर्मी में भी सेवा की थी। नाना पाटेकर 1999 में सेना के साथ डटकर खड़े हुए थे और सेवा के लिए अपना फिल्मी करियर भी किनारे कर दिया था। उनका सेना से लगाव तब हुआ जब उन्होंने एक रोल के लिए इंडियन आर्मी के बीच रहकर तीन साल तक कड़ी ट्रेनिंग ली थी। 1991 में नाना पाटेकर की एक फिल्म प्रहार द फाइनल अटैक रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने मेजर चौहान का किरदार निभाया था। इस किरदार को निभाने के लिए 1980 के आखिर में वे टेरिटोरियल आर्मी में आधिकारिक तौर पर शामिल हुए थे। नाना पाटेकर ने तीन साल तक मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ ट्रेनिंग की थी।
कारगिल युद्ध में सक्रिय सेवा
इस ट्रेनिंग के दौरान उनका इंडियन आर्मी के साथ गहरा लगाव हो गया और फिर जब भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध हुआ तब एक्टर ने बिना कुछ सोचे देश की सेवा करने का फैसला किया। उन्होंने इंडस्ट्री से ब्रेक लिया और अपने सीनियर अधिकारियों से सेना में सेवा करने की इच्छा जताई। हालांकि यह इतना आसान नहीं था। करियर के शिखर पर होते हुए भी उन्होंने फिल्मी दुनिया को किनारे रखकर राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता दी। 60 दिनों तक वे मोर्चे पर सक्रिय रहे और सैनिकों के साथ समय बिताया।
रक्षा मंत्री से अनुमति मांगी
यह फैसला रक्षा मंत्री ही कर सकते थे। इसके बाद नाना पाटेकर ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से भारतीय सेना के साथ मोर्चे पर जाने की अनुमति मांगी। उन्होंने मंत्री को अपनी शूटिंग स्किल्स और जीते हुए मेडल के बारे में भी बताया। क्लीयरेंस मिलने के बाद करियर के पीक पर उन्होंने बॉलीवुड से ब्रेक लिया। सेना के अनुशासन और राष्ट्रभक्ति ने उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाया। यह अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बना।
सेना से गहरा भावनात्मक जुड़ाव
प्रहार फिल्म की तैयारी के दौरान मिली ट्रेनिंग ने नाना पाटेकर को सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि एक समर्पित नागरिक बनाया। मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ बिताए तीन साल ने उन्हें सैन्य जीवन की कठिनाइयों और अनुशासन का प्रत्यक्ष अनुभव दिया। कारगिल युद्ध के समय उन्होंने इस अनुभव को व्यवहार में उतारा। सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना उनके लिए सिर्फ भूमिका नहीं बल्कि कर्तव्य था।
कलाकार से आगे राष्ट्रसेवक
नाना पाटेकर का यह पक्ष उन्हें सामान्य फिल्मी सितारों से अलग करता है। करियर के चरम पर एक्टिंग छोड़कर युद्ध क्षेत्र में जाना उनके देशप्रेम को दर्शाता है। जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर सक्रिय सेवा करना उनके साहस और समर्पण का प्रमाण है। आज जब उनकी विदाई हो रही है तब उनका यह योगदान भी याद किया जा रहा है। सिनेमा और सेना दोनों क्षेत्रों में उनकी सेवा देश के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। नाना पाटेकर ने साबित किया कि सच्चा कलाकार राष्ट्र के प्रति भी उतना ही समर्पित होता है।