उत्तर प्रदेश सहायक अभियोजन अधिकारी (UP APO) भर्ती 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई ने नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से अहम सवाल पूछा है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।
हाई कोर्ट ने आयोग से पूछा अहम सवाल
न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की एकलपीठ ने पंकज वर्मा समेत तीन अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग के अधिवक्ता से पूछा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने आवेदन करते समय आयु सीमा में छूट या किसी अन्य प्रकार के आरक्षण लाभ का उपयोग किया था या नहीं? याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि तीनों अभ्यर्थियों ने आयु सीमा में किसी प्रकार की छूट का लाभ नहीं लिया है।
क्या है पूरा विवाद?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में स्थान नहीं दिया गया। इसकी वजह से उन्हें आरक्षण का लाभ भी नहीं मिल पाया और वे चयन प्रक्रिया के अगले चरण में जगह बनाने से वंचित रह गए।
ऑफिस मेमोरेंडम को भी दी गई चुनौती
याचिका में 9 जनवरी 2020 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के साथ-साथ 30 अप्रैल 2026 को घोषित UP APO प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को भी चुनौती दी गई है।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि-
वर्तमान प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को निरस्त किया जाए।
मुख्य परीक्षा पर रोक लगाई जाए।
मेधावी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में समायोजित करते हुए नया परिणाम जारी किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग का 2020 का कार्यालय ज्ञापन उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम, 1994 की धारा 3(6) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए विभिन्न फैसलों की भावना के विपरीत है। आयोग के नियम के अनुसार आरक्षण का लाभ चयन के अंतिम चरण में दिया जाता है, जिस पर सवाल उठाए गए हैं।
कब होगी अगली सुनवाई?
इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को करेगा। वहीं, UP APO मुख्य परीक्षा 28 से 30 जून 2026 के बीच प्रस्तावित है। ऐसे में आने वाला फैसला हजारों उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।