मथुरा के प्रसिद्ध संत चंद्रशेखर बाबा जिन्हें फरसे वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता था की सड़क दुर्घटना में हुई संदिग्ध मौत के बाद हरिद्वार में शोक और भारी रोष का माहौल देखने को मिल रहा है। संत समाज इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है और इसे सामान्य दुर्घटना मानने को तैयार नहीं है।
संतों ने बाबा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की
धर्मनगरी हरिद्वार के परशुराम घाट पर अखण्ड परशुराम अखाड़े के बैनर तले एक शोक सभा का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत और स्थानीय लोग शामिल हुए। संतों ने बाबा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और मां गंगा के पावन जल में पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान संतों ने चंद्रशेखर बाबा की मौत को लेकर गहरा संदेह व्यक्त किया। उनका कहना है कि यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। अखण्ड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक और पंडित पवन शास्त्री ने कहा कि बाबा का पूरा जीवन गौ सेवा और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। ऐसे संत की इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना कई सवाल खड़े करता है।
संतों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि इसमें किसी की संलिप्तता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही संत समाज ने गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा में लगे साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
शोक सभा के दौरान संतों ने चेतावनी दी कि यदि चंद्रशेखर बाबा की मौत के मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल इस घटना ने मथुरा से लेकर हरिद्वार तक संत समाज में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।