कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। इस बार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने फिल्म, टीवी और सांस्कृतिक दुनिया से जुड़े कई चर्चित चेहरों को मैदान में उतारा था, लेकिन नतीजों के संकेतों में यह रणनीति पूरी तरह सफल होती नहीं दिख रही है। लोकप्रियता के भरोसे बनाई गई यह चुनावी रणनीति मतदाताओं के फैसले के सामने कमजोर पड़ती नजर आई है।
तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका, कई स्टार उम्मीदवार पीछे
तृणमूल कांग्रेस ने ब्रात्य बसु, सोहम चक्रवर्ती, सयंतिका बनर्जी, राज चक्रवर्ती, लवली मोइत्रा और अर्पिता घोष जैसे लोकप्रिय चेहरों को टिकट देकर मजबूत प्रचार अभियान चलाया था। पार्टी को उम्मीद थी कि इन चेहरों की लोकप्रियता वोटों में बदल जाएगी, लेकिन शुरुआती रुझानों में इनमें से कई उम्मीदवार अपनी सीटों पर बढ़त बनाने में संघर्ष करते दिखे। इससे पार्टी खेमे में निराशा का माहौल बन गया है।
भाजपा के स्टार उम्मीदवारों ने दिखाई मजबूती
दूसरी ओर भाजपा ने भी फिल्म और सांस्कृतिक जगत से जुड़े उम्मीदवारों पर भरोसा जताया था, जिनमें रूपा गांगुली, रुद्रनील घोष, शरबरी मुखर्जी और अग्निमित्रा पॉल जैसे नाम शामिल हैं। शुरुआती रुझानों में इनमें से कई उम्मीदवारों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देते हुए बढ़त हासिल की है, जिससे पार्टी को कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर मजबूती मिलती दिख रही है।
विश्लेषण: लोकप्रियता से ज्यादा निर्णायक बने स्थानीय मुद्दे
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में स्टार पावर से ज्यादा असर जमीनी संगठन, स्थानीय मुद्दों और सत्ता-विरोधी लहर का रहा है। मतदाताओं ने चेहरों की लोकप्रियता से अधिक क्षेत्रीय समस्याओं और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है कि केवल सेलिब्रिटी उम्मीदवारों के सहारे चुनावी बढ़त हासिल करना अब पहले जितना आसान नहीं रहा।