कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में है। मतदान से 72 घंटे पहले बाइक चलाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने इस निर्णय को 'अतार्किक' बताते हुए आयोग से हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
अदालत की सख्त टिप्पणियाँ:
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने चुनाव आयोग के वकील से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा:
शक्तियों का दुरुपयोग: "ऐसा लगता है कि आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है। आपके पास पुलिस, प्रशासन और सीसीटीवी हैं, तो फिर नागरिकों को इस तरह परेशान करने की क्या जरूरत है?"
इमरजेंसी जैसा माहौल: "अथॉरिटी सब कुछ ठप करने की कोशिश क्यों कर रही है? आप सीधे इमरजेंसी (आपातकाल) घोषित क्यों नहीं कर देते? अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो मानना होगा कि अथॉरिटी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।"
तर्कहीन प्रतिबंध: "सिर्फ बाइक ही क्यों? कारें भी बंद कर दीजिए। लोग कारों में भी हथियार या बम ले जा सकते हैं। इस तरह आम आदमी के अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।"
आयोग से मांगा रिकॉर्ड
हाईकोर्ट ने आयोग से पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड मांगते हुए पूछा कि कितनी बार बाइकों का इस्तेमाल हिंसा के लिए हुआ और कितनी एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान आयोग के पास शक्तियां जरूर होती हैं, लेकिन वह मनमाना फैसला नहीं ले सकता।
क्या था आयोग का आदेश?
निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के नाम पर मतदान से 48-72 घंटे पहले बाइक रैलियों और सामान्य बाइक आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। आयोग का तर्क था कि 'बाइक वाहिनी' अक्सर मतदाताओं को डराने-धमकाने का काम करती है।
आज फिर होगी सुनवाई
आयोग के कई फैसलों को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं, लेकिन बाइक बैन पर कोर्ट की यह टिप्पणी आयोग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। इस मामले की अगली सुनवाई आज शुक्रवार को होने की संभावना है, जहां आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।