30 अप्रैल और 1 मई 2026 की दरमियानी रात पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग स्ट्रॉन्ग रूम में घुसे और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया।
चुनाव आयोग का साफ इनकार
चुनाव आयोग (ECI) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित और सीलबंद हैं। आयोग के मुताबिक, जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसमें दिख रहे लोग कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि अधिकृत कर्मचारी थे, जो पोस्टल बैलेट की छंटनी की प्रक्रिया में शामिल थे।
पहले से दी गई थी जानकारी
आयोग ने यह भी बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी पहले ही सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को दे दी गई थी। नियमों के तहत और निगरानी में ही यह काम किया जा रहा था, ताकि काउंटिंग प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
TMC का विरोध और धरना
वहीं, TMC नेताओं ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं। इसी को लेकर पार्टी के नेता शशि पांजा और कुणाल घोष ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षा पर सवाल उठाए। मामला बढ़ने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं और पूरी घटना की गंभीरता से जांच की मांग की।