कोलकाता: करीब पांच दशक से कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन करने वाले पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड की भूमिका पर अब नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। कॉलेज स्ट्रीट में बने एक नए प्रकाशक संगठन ने आयोजन व्यवस्था में व्यापक भागीदारी की मांग उठाकर साहित्यिक जगत में नई बहस छेड़ दी है।
नए संगठन की एंट्री से बढ़ी हलचल
'बंगीय ग्रंथ उद्योग परिषद' नाम से गठित नए संगठन का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम 29 जून को महाजाति सदन में आयोजित होगा। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों के साथ विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी की संभावना है। इससे पुस्तक मेला आयोजन में बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
सभी प्रकाशकों को साथ लाने की मांग
नए संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि पुस्तक मेले का आयोजन केवल सीमित प्रकाशकों तक नहीं रहना चाहिए। उनका तर्क है कि राज्य के सभी प्रकाशकों और पुस्तक कारोबार से जुड़े संगठनों को समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि आयोजन अधिक समावेशी और पारदर्शी बन सके।
गिल्ड ने दावों को किया खारिज
दूसरी ओर, पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड ने इन अटकलों को महत्व नहीं दिया है। गिल्ड का कहना है कि 1976 से वही सफलतापूर्वक पुस्तक मेले का आयोजन करता आ रहा है और व्यवस्था बदलने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। संगठन ने स्पष्ट किया कि विभिन्न मंचों पर संवाद का स्वागत है, लेकिन आयोजन को लेकर भ्रम फैलाने का कोई आधार नहीं है।
साहित्यिक जगत की निगाहें अब 29 जून पर
अब सबकी नजर 29 जून के कार्यक्रम पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस मंच से पुस्तक मेले के भविष्य, प्रकाशकों की भागीदारी और आयोजन की नई रूपरेखा को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं।