कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नगर निगम के परिसीमन मामले, चुनाव की संभावित तारीखों, वक्फ संपत्ति पर कथित कब्जे और कांग्रेस के एसआईआर विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इन मुद्दों पर राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिल रहा है।
परिसीमन मामले में अदालत का हस्तक्षेप नहीं, जल्द चुनाव कराने की मांग
कोलकाता नगर निगम के परिसीमन से जुड़े मामले में अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया। इस मुद्दे पर जल्द चुनाव कराने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा गया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों तक सरकारी सेवाएं तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं। बयान में दावा किया गया कि 4 मई को नई सरकार के आने के बाद मेयर और पार्षदों के इस्तीफे की स्थिति बनी है। साथ ही, परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर अदालत की आपत्ति पर भी सवाल उठाए गए।
जावेद खान और उनके बेटे पर वक्फ संपत्ति कब्जाने का आरोप
तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए जावेद खान और उनके बेटे के खिलाफ वक्फ संपत्ति पर कथित कब्जे का आरोप लगाया गया। बयान में टीएमसी को लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाली पार्टी बताते हुए सरकारी जमीन और वक्फ संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे का मुद्दा उठाया गया। साथ ही, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा गया कि किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
एसआईआर के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, पार्टी के अस्तित्व पर सवाल
कोलकाता में एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की गई। कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि पार्टी का जनाधार और प्रभाव लगातार कम हो रहा है। बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह के प्रदर्शनों से लोगों की सोच में बदलाव लाना आसान नहीं है।
नवंबर-दिसंबर में चुनाव की चर्चा, अंतिम फैसला चुनाव आयोग पर
कोलकाता नगर निगम चुनाव की तारीखों को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। नवंबर और दिसंबर के आसपास चुनाव कराए जाने की संभावनाओं पर चर्चा होने की बात कही गई। हालांकि, चुनाव कब होंगे, इसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग के कार्यक्रम और आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेगा।
फिरहाद हकीम के आवास के बाहर प्रदर्शन पर टिप्पणी
फिरहाद हकीम के आवास के सामने हुए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि कौन बड़ा गद्दार है और कौन छोटा, यह संबंधित लोगों का आपसी मामला है। इस टिप्पणी के जरिए राजनीतिक विवाद पर प्रतिक्रिया दी गई, लेकिन पूरे मामले में संबंधित पक्षों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे।
काजल शेख की सुरक्षा हटाने और बयान पर भी चर्चा
काजल शेख की सुरक्षा हटाए जाने और उनके बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई। इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि संबंधित नेताओं की राजनीतिक संबद्धता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, हालांकि इसे बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं बताया गया।
फिलहाल कोलकाता नगर निगम चुनाव की तारीखों, परिसीमन और विभिन्न राजनीतिक विवादों को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल जारी है। चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चुनावी कार्यक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी।