कोलकाता: बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग के कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने के लिए बारुईपुर जाने से रोकने के उद्देश्य से उनके कोलकाता स्थित आवास पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। इस दावे के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
आवास के बाहर भारी पुलिस तैनाती पर उठाए सवाल
रविवार शाम को कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती देखी गई। ममता ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके घर के बाहर लगातार मार्च कर रही थी और उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने औपचारिक रूप से यह नहीं बताया कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है।
पीड़ित परिवार से मिलने जाना चाहती थीं ममता
ममता बनर्जी ने कहा कि उनका उद्देश्य बारुईपुर जाकर पीड़ित बच्ची के परिजनों से मिलना और उन्हें सांत्वना देना था। उन्होंने कहा कि घटना से पूरे इलाके में लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है और सरकार को जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
TMC ने लगाया सरकार पर गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के बारुईपुर जाने की जानकारी मिलते ही उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगाए गए। पार्टी ने कहा कि उनकी नेता को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन न्याय की मांग जारी रहेगी। TMC ने पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
अभिषेक बनर्जी ने परिवार से की बात
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बताया कि उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रभाव के कारण आरोपियों को बचने नहीं दिया जाना चाहिए और निष्पक्ष व त्वरित न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।
बारुईपुर की घटना पर सियासत तेज
बारुईपुर की इस दर्दनाक घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। एक ओर जहां विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।