भोपाल- मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को प्रदेश के 23 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सागर, दमोह, बैतूल, देवास, आलीराजपुर, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और अनूपपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं रतलाम, उज्जैन, धार, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
भोपाल समेत कई जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, आगर-मालवा, राजगढ़ और राजधानी भोपाल में भी हल्की से तेज बारिश होने की संभावना है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है।
रविवार को 25 से ज्यादा जिलों में बरसे बादल
रविवार को भी प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। सीहोर में दिन के समय घने काले बादलों के कारण अंधेरा छा गया, जबकि शाजापुर में सबसे अधिक 28 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश के बाद कालीसिंध नदी उफान पर पहुंच गई। पांढुर्णा जिले के सीतापार के पगड़ी गांव में बिजली गिरने से 48 वर्षीय महिला सुलोचना तड़ाम की मौत हो गई।
छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के अनुसार सबसे अधिक वर्षा छिंदवाड़ा में दर्ज की गई, जहां ढाई इंच से ज्यादा पानी बरसा। इसके अलावा सिवनी, उज्जैन और श्योपुर में लगभग पौन इंच, जबकि टीकमगढ़ और ग्वालियर में आधा इंच बारिश हुई। इंदौर, राजगढ़, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सीधी, बालाघाट, शाजापुर, भिंड, विदिशा, सीहोर, मंदसौर और पांढुर्णा में भी बारिश का दौर जारी रहा।
तापमान में आई गिरावट
लगातार बारिश के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंदौर का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री, भोपाल का 32.2 डिग्री, उज्जैन का 32.7 डिग्री, जबलपुर का 34 डिग्री और ग्वालियर का 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सबसे अधिक तापमान खजुराहो में 39 डिग्री और सबसे कम बैतूल में 27 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
अब तक 6.4 इंच बारिश, फिर भी सामान्य से कम
प्रदेश में मानसून के दौरान अब तक औसतन 163.1 मिलीमीटर यानी करीब 6.4 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि यह सामान्य औसत 172.8 मिलीमीटर (6.8 इंच) से करीब 6 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 29 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 17 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
जुलाई से बढ़ीं अच्छी बारिश की उम्मीदें
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जून में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। सामान्य तौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जुलाई में ही होता है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक वर्षा 37.3 इंच मानी जाती है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में औसतन 38 से 39 इंच तक बारिश होती है।