भोपाल: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। बैतूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था किसी भी स्थिति में बंद नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
'कुछ लोगों के विरोध से नहीं रुकेगी व्यवस्था'
मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों की आपत्तियों के कारण ई-अटेंडेंस जैसी पारदर्शी व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि अधिकांश शिक्षक इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं और इसका सकारात्मक प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
98% अतिथि और 90% नियमित शिक्षक दर्ज कर रहे उपस्थिति
उदय प्रताप सिंह के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के करीब 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 90 प्रतिशत नियमित शिक्षक मोबाइल या अन्य स्वीकृत माध्यमों से समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
नेटवर्क प्रभावित क्षेत्रों को दी गई राहत
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि प्रदेश के लगभग 1,000 गांवों में नेटवर्क की समस्या अब भी बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों के करीब 7 से 8 प्रतिशत शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज कराने में विशेष राहत दी गई है। इसके अलावा मातृत्व अवकाश, गंभीर बीमारी और अन्य विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के लिए भी आवश्यक छूट का प्रावधान किया गया है।
TET मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) विवाद पर मंत्री ने कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा है कि शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों के अनुसार की गई थीं। उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रही है। यदि अदालत दोबारा TET परीक्षा कराने का निर्देश देती है, तो राज्य सरकार उसके लिए भी पूरी तरह तैयार है।