मायापुर :पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र मायापुर के इस्कॉन चंद्रोदय मंदिर में दिवाली से पहले ही अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। कार्तिक मास (दामोदर मास) के अवसर पर मंदिर प्रांगण सैकड़ों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा है। कोजागरी लक्ष्मी पूर्णिमा के पावन दिन से शुरू हुआ यह दीपदान महोत्सव आगामी रास पूर्णिमा तक पूरे एक महीने तक पूरी श्रद्धा और धूमधाम से चलेगा। इस महोत्सव में भाग लेने के लिए देश ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी भक्त भी बड़ी संख्या में मंदिर में उपस्थित हो रहे हैं।
शाम ढलते ही दीपों की रोशनी में डूबा प्रांगण, गूंज उठा दामोदराष्टकम
प्रतिदिन शाम होते ही चंद्रोदय मंदिर में संध्या आरती का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आरती के बाद मंदिर में उपस्थित सभी भक्त अपने हाथों में शुद्ध घी के मिट्टी के दीये लेकर भगवान श्री राधा-माधव और दामोदर स्वरूप के समक्ष अर्पित करते हैं। इस दौरान पूरा परिसर 'नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं...' के दिव्य दामोदराष्टकम पाठ और 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे' महामंत्र के संकीर्तन से गुंजायमान हो उठता है। भक्त हाथों में दीप थामकर भगवान के विग्रहों के सामने श्रद्धापूर्वक नृत्य और परिक्रमा करते नजर आते हैं।
सभी के लिए निःशुल्क दीपदान व्यवस्था, विश्वभर के इस्कॉन केंद्रों में एक साथ उत्सव
इस्कॉन मायापुर के जनसंपर्क अधिकारी रसिक गौरांग दास ने बताया कि इस्कॉन के वैश्विक मुख्यालय मायापुर समेत दुनिया भर के सभी शाखा केंद्रों में यह पारंपरिक दीपदान महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह अनुष्ठान इस वर्ष 26 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर (रास पूर्णिमा) तक चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाले किसी भी श्रद्धालु से कोई शुल्क नहीं लिया जाता; जाति, धर्म और वर्ण के भेद से परे सभी भक्तों के लिए शाम 7 बजे से रात 8 बजे तक निःशुल्क दीप प्रदान किए जाते हैं। सुचारू व्यवस्था के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों का प्रबंध किया गया है।
अज्ञान के अंधकार को मिटाकर विश्व कल्याण की कामना
सनातन परंपरा में कार्तिक मास के दौरान दीपदान का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस पवित्र माह में भगवान दामोदर को घी का दीपक अर्पित करने से जीवन से अज्ञान और नकारात्मकता का अंधकार दूर होता है तथा ईश्वरीय कृपा व आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है। इस्कॉन प्रवक्ताओं के अनुसार, यह प्रकाश, आनंद और प्रेम का उत्सव है, जिसके माध्यम से न केवल पूर्वजों की स्मृति को नमन किया जाता है, बल्कि 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' के संदेश के साथ समस्त जीव जगत और विश्व के कल्याण व शांति की मंगल कामना की जाती है