भोपाल | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सात अधिवक्ताओं को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है। इन नियुक्तियों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या मौजूदा 38 से बढ़कर 45 हो जाएगी। कॉलेजियम की बैठक के बाद जारी आधिकारिक वक्तव्य में सातों अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की गई है। माना जा रहा है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से अदालत की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।
इन 7 अधिवक्ताओं के नामों की हुई सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए निम्नलिखित सात अधिवक्ताओं के नामों की अनुशंसा की है:
- डॉ. विवेक शरण
- राजेश कुमार शुक्ला
- कनक गहरवार उर्फ कनक लता सिंह
- भक्ति व्यास
- श्रेयस पंडित
- मृणाल एलकर उर्फ मृणाल मजूमदार
- अविनाश जरगर
न्यायाधीशों की संख्या 38 से बढ़कर 45 होगी
वर्तमान में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं। सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी। न्यायाधीशों की संख्या में यह वृद्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे मामलों की सुनवाई के लिए अधिक न्यायिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि, लंबित मामलों के निपटारे की गति पर इसका वास्तविक प्रभाव नियुक्तियों के पूरा होने और अदालत के कामकाज सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया के बाद मिलेगी नई जिम्मेदारी
कॉलेजियम की अनुशंसा नियुक्ति प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर ही नियुक्तियां प्रभावी होंगी। सातों अधिवक्ताओं की नियुक्ति पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 45 हो जाएगी।