नई दिल्ली - कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के व्यापारियों के समर्थन में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट्रो सेवाएं बंद करने, सड़कों को सील करने और राजधानी में प्रतिबंध लगाने से कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने इन प्रतिबंधों को अपने 'वोट चोरी' के आरोपों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को 'आरोपी नंबर 4' बताते हुए कहा कि उन्हें हटाने से विरोध प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा।
'आरोपी नंबर 4 को पद से हटाएं'
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिल्ली के व्यापारियों को संबोधित करते हुए उनके प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि वह कारोबारियों की परेशानी और उनकी चिंताओं को समझते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने मेट्रो सेवाएं बंद करके, रास्तों को सील करके और पूरी दिल्ली की घेराबंदी करके कारोबार को प्रभावित किया है।
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि 'वोट चोरी' से किसी की दुकान, जमा पूंजी और बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। राहुल गांधी का दावा है कि ऐसा किए जाने पर विरोध प्रदर्शन महज 30 सेकंड में बंद हो जाएगा।
व्यापारियों ने राहुल गांधी से क्यों की रैली टालने की अपील?
राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस नेता से 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्षी रैली स्थगित करने का अनुरोध किया है। यह रैली नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होनी है, जिसमें इंडिया ब्लॉक के नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
व्यापारियों का कहना है कि हाल के विरोध प्रदर्शनों और बंद के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है। ऐसे में त्योहारों के व्यस्त खरीदारी सीजन के दौरान एक और बड़े प्रदर्शन से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। CTI ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख पर पुनर्विचार करने की अपील की थी।
10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर की आशंका
व्यापारी संगठन ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित रैली के कारण करीब 10,000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है। कारोबारियों के मुताबिक, दिवाली के आसपास बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है और व्यापारी पूरे साल के महत्वपूर्ण कारोबारी दौर के लिए तैयारी करते हैं।
CTI ने अपने पत्र में त्योहारों की तारीखों का उल्लेख करते हुए कहा कि धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के अवसर पर लोग कई दिन पहले से खरीदारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में यातायात प्रतिबंधों और विरोध प्रदर्शनों से बाजारों तक पहुंचने में लोगों को परेशानी हो सकती है।
दिल्ली में त्योहारों के दौरान 25 हजार करोड़ के कारोबार का दावा
CTI के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस और दिवाली के दौरान सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, सूखे मेवे, मिठाइयां, ऑटोमोबाइल और उपहारों की खरीदारी से करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। संगठन ने इसे दिल्ली की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने से छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक को नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की है कि विरोध प्रदर्शनों की तारीख तय करते समय बाजारों और आम लोगों की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाए।
'वोट चोरी' के आरोप और कारोबारियों की चिंता आमने-सामने
इस पूरे मामले में एक ओर कांग्रेस 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों ने त्योहारों के दौरान संभावित कारोबारी नुकसान पर चिंता जताई है। राहुल गांधी ने कारोबारियों के प्रति समर्थन जताते हुए अपनी राजनीतिक मांग दोहराई है, जबकि CTI चाहता है कि प्रस्तावित रैली की तारीख पर फिर से विचार किया जाए।
अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होती है या नहीं।