नई दिल्ली - करवा चौथ का पावन पर्व 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ सरगी से लेकर चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, आस्था और परंपरा के इस पर्व पर अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहने से कुछ महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और कुछ पुरानी बीमारियों से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

किन महिलाओं के लिए निर्जला व्रत हो सकता है जोखिम भरा?
निर्जला व्रत में लंबे समय तक पानी नहीं पीने और भोजन नहीं करने से शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में यह जोखिम और बढ़ जाता है।
1. गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण की जरूरत होती है। लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहने पर डिहाइड्रेशन और कमजोरी का खतरा बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
2. स्तनपान कराने वाली माताएं: बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान शरीर की तरल और ऊर्जा संबंधी जरूरतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में पूरे दिन पानी नहीं पीने से मां को डिहाइड्रेशन और थकान हो सकती है। खासकर नवजात को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
3. डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं: मधुमेह की मरीजों में लंबे समय तक भोजन नहीं करने और इंसुलिन या कुछ दवाएं लेने से ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। वहीं, कुछ परिस्थितियों में ब्लड शुगर बढ़ने और डिहाइड्रेशन का जोखिम भी रहता है। डायबिटीज की दवाएं अपने आप कम या बंद न करें और व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
4. दिल की बीमारी से जूझ रही महिलाएं: हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं के लिए निर्जला व्रत के दौरान पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि, जोखिम बीमारी और दवाओं पर निर्भर करता है। ऐसी महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक पानी और भोजन से दूर नहीं रहना चाहिए।
एनीमिया, किडनी रोग और लो बीपी में भी बरतें सावधानी
गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही महिलाओं को पहले से ही थकान, सांस फूलने और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। निर्जला व्रत के दौरान ये लक्षण अधिक महसूस हो सकते हैं। इसी तरह, लो ब्लड प्रेशर की समस्या वाली महिलाओं में लंबे समय तक पानी नहीं पीने से चक्कर आने या बेहोशी का खतरा बढ़ सकता है। किडनी रोग से पीड़ित महिलाओं के लिए भी व्रत का सुरक्षित होना उनकी बीमारी की स्थिति और निर्धारित तरल सेवन पर निर्भर करता है। इसलिए उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेकर ही निर्णय लेना चाहिए।
पीरियड्स के दौरान जिन महिलाओं को अत्यधिक कमजोरी, भारी रक्तस्राव या तेज दर्द होता है, उन्हें भी अपनी शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में निर्जला उपवास रखने से परेशानी बढ़ सकती है।
निर्जला व्रत से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं?
लंबे समय तक पानी नहीं पीने से शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। इसके कारण सिरदर्द, मुंह सूखना, थकान, चक्कर आना और पेशाब कम होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी हो सकता है, जो शरीर की मांसपेशियों और हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर का असामान्य रूप से गिरना या बढ़ना भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि, हर महिला के शरीर पर उपवास का असर एक जैसा नहीं होता। जोखिम उम्र, स्वास्थ्य, दवाओं, मौसम और व्रत की अवधि जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
करवा चौथ पर सेहत का ध्यान कैसे रखें?
व्रत से पहले सलाह लें: यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो पहले डॉक्टर से बात करें।
सरगी में पौष्टिक भोजन लें: यदि आप व्रत रख रही हैं, तो सरगी में संतुलित भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ लें, बशर्ते आपकी स्वास्थ्य स्थिति में इनकी मनाही न हो।
अनावश्यक मेहनत से बचें: तेज धूप, भारी व्यायाम और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से बचें।
दवाओं में बदलाव न करें: डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं की खुराक या समय में बदलाव न करें।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें: तेज चक्कर, बेहोशी, भ्रम, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी होने पर व्रत जारी रखने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
आस्था के साथ सेहत को प्राथमिकता देना भी जरूरी
करवा चौथ पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। लेकिन व्रत रखने का निर्णय अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर व्रत के नियमों में बदलाव करना या निर्जला उपवास से बचना स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित हो सकता है।
याद रखें: हर महिला के लिए निर्जला व्रत अनिवार्य रूप से सुरक्षित नहीं होता। यदि व्रत से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने की आशंका है, तो चिकित्सकीय सलाह लें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।