नई दिल्ली - यूपीआई से भुगतान करने वालों और कारोबारियों के लिए अहम खबर है। यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्ताव दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है, लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अभी तक इसकी नई तारीख घोषित नहीं की है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस नियम को लागू करने में एक बार फिर देरी हो सकती है। व्यापारी संगठन चाहते हैं कि नया नियम नवंबर के बजाय 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाए, ताकि कारोबारियों को जरूरी तैयारियां करने का पर्याप्त समय मिल सके।
NPCI ने अभी तक नहीं बताई नई तारीख
NPCI के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दिलीप असबे ने पहले मिंट से बातचीत में कहा था कि यूपीआई पर MDR से जुड़े फैसले को दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है। उन्होंने बताया था कि इसे लागू करने की अंतिम तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
हालांकि, नई तारीख का ऐलान नहीं होने से कारोबारियों के बीच असमंजस बना हुआ है। व्यापारी संगठन चाहते हैं कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसकी शर्तें स्पष्ट हों और कारोबारियों को नए सिस्टम के लिए तैयारी करने का पर्याप्त समय मिले।
क्या है MDR चार्ज और व्यापारी क्यों कर रहे विरोध?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों से भुगतान प्रक्रिया के बदले लिया जा सकता है। यह शुल्क भुगतान की व्यवस्था और संबंधित नियमों के आधार पर लागू होता है।व्यापारियों की चिंता है कि यदि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इससे उनकी लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों और कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए अतिरिक्त खर्च परेशानी पैदा कर सकता है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) समेत व्यापारी संगठनों ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है। कारोबारी प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर अपनी चिंताओं को सामने रखा था। उनका कहना है कि यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान पर अतिरिक्त लागत डालने से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
दिवाली के बाद भी क्यों नहीं चाहते कारोबारी नया नियम?
NPCI ने त्योहारों के व्यस्त सीजन को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को दिवाली तक टालने का निर्णय लिया था। धनतेरस, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और अन्य उत्पादों की बिक्री के साथ डिजिटल भुगतान भी बड़ी मात्रा में होता है।
ऐसे समय में भुगतान से जुड़ी नई व्यवस्था लागू करने से कारोबारियों को अतिरिक्त लागत और तकनीकी बदलावों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारी संगठनों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान बाजार पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव डालने के बजाय नए नियम को लागू करने के लिए बेहतर तैयारी की जानी चाहिए।
जनवरी 2027 से लागू करने की मांग क्यों?
व्यापारी संगठन चाहते हैं कि MDR से जुड़ी नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू की जाए। उनका कहना है कि दिवाली के तुरंत बाद शादी-ब्याह का सीजन शुरू हो जाता है। इसके अलावा सर्दियों की खरीदारी, क्रिसमस और नए साल के दौरान भी बाजारों में गतिविधियां बढ़ती हैं।
इस दौरान लोग कपड़ों, सजावट के सामान, खाने-पीने की चीजों और अन्य उत्पादों पर खर्च करते हैं। कैटरिंग, पार्टी स्थलों और कार्यक्रमों की बुकिंग पर भी बड़ी रकम खर्च होती है। ऐसे में कारोबारी नहीं चाहते कि व्यस्त कारोबारी अवधि के बीच भुगतान प्रणाली से जुड़ा नया शुल्क लागू हो। उनका मानना है कि जनवरी 2027 से व्यवस्था लागू करने पर कारोबारियों को अपनी भुगतान प्रणाली, लागत और व्यावसायिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
UPI इस्तेमाल करने वालों पर क्या होगा असर?
MDR लागू होने की स्थिति में इसका सीधा असर सबसे पहले उन कारोबारियों पर पड़ सकता है, जिनसे यह शुल्क लिया जाएगा। आम ग्राहकों पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम क्या तय किए जाते हैं और शुल्क किस तरह लागू होता है। फिलहाल NPCI की ओर से नई तारीख और नियमों की पूरी जानकारी सामने आने का इंतजार है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगेगा या ग्राहकों को सीधे अधिक पैसे देने होंगे।
अब NPCI के फैसले पर टिकी नजरें
यूपीआई पर MDR को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। NPCI ने पहले इसे दिवाली के बाद तक टालने की बात कही थी, जबकि व्यापारी संगठन जनवरी 2027 से इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि NPCI नई तारीख कब घोषित करता है और अंतिम व्यवस्था में कारोबारियों की मांगों को कितनी जगह मिलती है। तब तक यूपीआई पर MDR लागू होने की तारीख और शुल्क से जुड़े दावों को आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही देखना उचित होगा।