कोलकाता: दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न पंडालों के पास लगाए गए बुकस्टॉलों और वहां रखी गई किताबों को लेकर पश्चिम बंगाल का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर स्टॉल लगाकर राष्ट्र विरोधी और सनातन विरोधी सामग्री के प्रचार की कोशिश की गई थी, जिसे राज्य के जागरूक नागरिकों ने खुद आगे आकर नाकाम कर दिया है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि किसी भी सूरत में सनातन धर्म या किसी भी धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचाने वाले साहित्य या विचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धार्मिक आस्था पर चोट बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री की दो-टूक
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उत्सव के माहौल में धर्म और राष्ट्र की मूल भावना के खिलाफ दुष्प्रचार करने का सुनियोजित प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि जब स्टॉल लगाकर इस तरह के सनातन विरोधी विचार थोपने की कोशिश हुई, तो आम लोगों ने स्वतः स्फूर्त होकर उसका लोकतांत्रिक व सामाजिक प्रतिरोध किया। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को अपमानित करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
वाममोर्चा और तृणमूल ने साधा निशाना, 29 अक्टूबर को विरोध मार्च
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। माकपा (CPM) की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि जनता ने किसी दुष्प्रचार को नहीं, बल्कि बुकस्टॉल तोड़ने आए बुलडोजर और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान साहित्यकारों की किताबों को पैरों तले रौंदने वालों का विरोध किया है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि चाहे सीपीएम हो, टीएमसी या एसयूसीआई, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किताबों के स्टॉल पर हमले की संस्कृति को किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराया जा सकता। इस विवाद के विरोध में वामपंथी व नागरिक संगठनों ने आगामी 29 अक्टूबर को बिना किसी दल के बैनर के 'बइय़ेर जोन्नो हांटुन' (किताबों के लिए चलो) शीर्षक से एक विशाल मौन जुलूस निकालने का एलान किया है, जिसमें सभी प्रतिभागियों से अपने हाथ में एक किताब लेकर शामिल होने की अपील की गई है।
किताबों पर हमलों को लेकर अपनी ही पार्टी में अलग-अलग राय
दिलचस्प बात यह है कि किताबों के स्टॉल को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद देखने को मिले हैं। जहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने वामपंथी बुकस्टॉलों पर हमले की खुलकर आलोचना की है, वहीं आमता के भाजपा विधायक खुद सीपीएम के स्टॉल पर जाकर किताबें खरीदते नजर आए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस सख्त बयान ने राज्य में शिक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी और वैचारिक संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।