उत्तर प्रदेश समाचार: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में शरद ऋतु को ध्यान में रखते हुए रामलला के दर्शन और आरती की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब आरती के दौरान बिना पास वाले सामान्य श्रद्धालु भी रामलला के दर्शन कर सकेंगे। इससे भक्तों को दर्शन करने में सुविधा मिलेगी और अधिक श्रद्धालु आसानी से रामलला के दर्शन कर पाएंगे। राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने बताया कि देश के प्रमुख मंदिरों में मौसम के अनुसार ग्रीष्मकालीन और शरद ऋतु की अलग-अलग व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं। इसी परंपरा के तहत अयोध्या के राम मंदिर में भी दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
शरद ऋतु के अनुसार बदली दर्शन व्यवस्था
राजकुमार दास के मुताबिक, शरद ऋतु में रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं। मौसम में इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए प्रातःकालीन दर्शन की अवधि में परिवर्तन किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मंदिर व्यवस्था समिति ने यह निर्णय लिया है। यह बदलाव राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के निर्देश पर किया गया है।
अब आरती के दौरान भी होंगे रामलला के दर्शन
नई व्यवस्था का एक प्रमुख बदलाव आरती के समय दर्शन को लेकर है। पहले आरती के दौरान सामान्य श्रद्धालुओं के दर्शन रोक दिए जाते थे। अब आरती जारी रहने के दौरान भी श्रद्धालु दर्शन करते हुए आगे बढ़ सकेंगे। जिन भक्तों के पास आरती पास है, वे पहले की तरह आरती में शामिल हो सकेंगे। इसके साथ ही बिना पास वाले सामान्य श्रद्धालुओं को भी आरती के दौरान रामलला के दर्शन का अवसर मिलेगा। इससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रामलला की बाल स्वरूप में सेवा का विशेष महत्व
राजकुमार दास ने कहा कि राम मंदिर में भगवान श्रीराम बाल स्वरूप में विराजमान हैं। भक्त उनके बाल रूप को वात्सल्य भाव से देखते हैं और इसी भावना से उनकी सेवा-पूजा करते हैं। उन्होंने भगवान राम को जगत का पालक और नियंता बताते हुए कहा कि रामलला की सेवा परंपरा में भक्तिभाव और श्रद्धा का विशेष महत्व है।
राम मंदिर में भव्य रूप से मनाई जाएगी महर्षि वाल्मीकि जयंती
महर्षि वाल्मीकि जयंती के आयोजन पर चर्चा करते हुए राजकुमार दास ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि आदि कवि हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन और चरित्र को महाकाव्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे वाल्मीकि रामायण के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद इस वर्ष महर्षि वाल्मीकि जयंती को विशेष रूप से भव्य रूप में मनाने की योजना है। इस अवसर पर वाल्मीकि रामायण के विशिष्ट विद्वानों का सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
भगवान राम का संदेश: समाज में समरसता और सौहार्द
राजकुमार दास ने कहा कि भगवान राम का जीवन समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और समरसता स्थापित करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने स्वयं ईश्वर होते हुए भी आदर्श मनुष्य के रूप में जीवन जिया और समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में सौहार्द, एकता और समरसता बनाए रखने का प्रयास किया जाना चाहिए। राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था में किया गया यह बदलाव श्रद्धालुओं की सुविधा और भगवान राम के प्रति उनकी आस्था को ध्यान में रखकर किया गया है।