नई दिल्ली - नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित होने वाली इस रैली में इंडिया ब्लॉक के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। रैली का मुख्य मुद्दा एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध करना है। हालांकि, त्योहारों के बाद कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर व्यापारियों ने चिंता जताई है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने व्यापारियों की अपील पर विचार करने की बात कही है।
रैली टालने की व्यापारियों ने की अपील
कांग्रेस की ओर से रैली की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
CTI का कहना है कि दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों के कारण स्थानीय कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाली रैली से भी व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारियों ने अनुरोध किया है कि रैली को दिवाली के बाद किसी अन्य तारीख पर आयोजित करने पर विचार किया जाए, ताकि बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से चल सके।
खरगे बोले- लोगों की आवाज उठाना हमारी जिम्मेदारी
व्यापारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष देश के लोगों की आवाज उठाने का काम कर रहा है। उन्होंने 'वोट चोरी' के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है।
खरगे के मुताबिक, अगर लोगों के पास वोट देने का अधिकार ही नहीं रहेगा, तो इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है, क्योंकि इसका संबंध कारोबारियों से लेकर अपने भविष्य के लिए अवसर तलाश रहे विद्यार्थियों तक से है।
हालांकि, खरगे ने यह भी कहा कि व्यापारियों की ओर से अनुरोध मिला है और पार्टी इस पर विचार जरूर करेगी। उनके इस बयान के बाद रैली की तारीख में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एसआईआर के खिलाफ विपक्ष की लामबंदी
विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में होने वाली प्रस्तावित रैली के जरिए इंडिया ब्लॉक इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, रैली के आयोजन को लेकर व्यापारियों की चिंता ने राजनीतिक विरोध के साथ-साथ राजधानी में बाजारों और कारोबार पर पड़ने वाले असर को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली तय कार्यक्रम के अनुसार होगी या इसकी तारीख में बदलाव किया जाएगा।