मध्य प्रदेश : ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की गई है। याचिका में हादसे के पीछे कथित प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों का मुद्दा उठाया गया है। अधिवक्ता विभोर कुमार साहू की ओर से दायर याचिका में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य सचिव से लेकर ग्वालियर कलेक्टर तक को नोटिस
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ग्वालियर के अध्यक्ष/कलेक्टर, संभागीय आयुक्त, ग्वालियर कलेक्टर, ग्वालियर एसपी और ग्वालियर आरटीओ शामिल हैं। याचिका में हादसे के लिए जिम्मेदार बताई गई व्यवस्थागत खामियों की जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में अधिकारियों की लापरवाही साबित होना नहीं है।
याचिका में यातायात प्रबंधन और बैरिकेडिंग पर सवाल
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। याचिका के मुताबिक, जिस मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद थी, वहां ट्रक के प्रवेश और आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक बताते हुए कहा गया है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर पहले से सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इस सड़क हादसे में 16 लोगों की जान चली गई थी। याचिका में घटना के कारणों और जिम्मेदारी तय करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
रतनगढ़ हादसे का भी दिया गया हवाला
याचिका में पूर्व में हुए रतनगढ़ हादसे जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, इससे पहले की कार्रवाई में प्रतिबंधित या संवेदनशील मार्ग पर ट्रक को गुजरने देने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। इस मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और हादसे से जुड़े आरोपों पर जवाब सामने आ सकते हैं। मामले का मुख्य सवाल यह है कि धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के दौरान सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी कैसे तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।