इंदौर | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगम, पुलिस और प्रशासन को कचरा संग्रहण वाहनों की आवाज कम करने और शहर के सभी पुलिस थानों में साउंड मीटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच ने अमिताभ उपाध्याय से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों को कचरा गाड़ी आने की सूचना देना जरूरी है, लेकिन इसके लिए तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाना उचित नहीं है।
कचरा गाड़ियों में बजने वाले स्वच्छता गीत की आवाज होगी कम
हाईकोर्ट ने कचरा संग्रहण वाहनों पर बजने वाले स्वच्छता गीत की आवाज निर्धारित ध्वनि मानकों के भीतर रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आवाज को मौजूदा स्तर के 25 प्रतिशत तक सीमित करने के विकल्प पर अमल किया जाए। कोर्ट का मानना है कि कचरा गाड़ियों की सूचना नागरिकों तक पहुंचनी चाहिए, लेकिन अत्यधिक तेज आवाज से लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। नगर निगम को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने होंगे।
इंदौर के हर पुलिस थाने में उपलब्ध होगा साउंड मीटर
ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने इंदौर के सभी पुलिस थानों में ध्वनि मापक उपकरण यानी साउंड मीटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इन उपकरणों की मदद से शिकायत मिलने पर शोर के स्तर को मापा जा सकेगा और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने में आसानी होगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों के संपर्क नंबर समाचार पत्रों और पुलिस की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।
साइलेंस जोन की सूची अखबारों में होगी प्रकाशित
हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को दिए गए आदेश का संतोषजनक पालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने प्रशासन को शहर में घोषित सभी साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा नए शांत क्षेत्र घोषित करने के लिए नागरिकों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां शोर से लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है और अतिरिक्त नियंत्रण की जरूरत है।
हर वार्ड में दो वॉलंटियर करेंगे ध्वनि प्रदूषण की निगरानी
ध्वनि प्रदूषण पर निगरानी रखने के लिए कोर्ट ने शहर के प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवकों को नामित करने के निर्देश दिए हैं। ये वॉलंटियर शोर से जुड़ी शिकायतें पुलिस तक पहुंचाने में मदद करेंगे। जरूरत पड़ने पर स्वयंसेवक संबंधित घटनाओं के वीडियो भी उपलब्ध करा सकेंगे। इससे प्रशासन को शिकायतों की जानकारी मिलने और संबंधित मामलों में कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है।
नवरात्रि और दशहरे के दौरान शोर पर भी हाईकोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नवरात्रि और दशहरे के दौरान हुए ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने पुलिस से शोर से संबंधित प्राप्त शिकायतों और स्वयं संज्ञान लेकर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण पेश करने को कहा है। अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर आदेश के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती से लागू होंगे नियम?
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई और साइलेंस जोन की पहचान से जुड़े कदमों पर नजर रहेगी। नगर निगम, पुलिस और प्रशासन को निर्धारित समयसीमा के भीतर आदेश के अनुपालन की जानकारी कोर्ट के सामने रखनी होगी। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट होगा कि संबंधित विभागों ने निर्देशों पर कितना अमल किया है।